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एक कविता: ढोंगियों का दल - काज़ी नज़रुल इस्लाम

                                एक कविता :  ढोंगियों का दल                                                    -  काजी नज़रुल इस्लाम मनुष्य से घृणा कर के कौन लोग कुरान,वेद,बाइबिल चूम रहे हैं बेतहाशा किताब और ग्रंथ छीन लो जबरन उनसे मनुष्य को मारकर ग्रंथ पूज रहा है ढोंगियों का दल सुनो मूर्खो,मनुष्य ही लाया है ग्रंथ ग्रंथ नहीं लाया किसी मनुष्य को!                                       ★★★

कृष्ण-जन्माष्टमी की मंगलकामना

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                                                    एक थे कृष्ण-कन्हैया...                  हिंस्र कंस-संस्कृति से गो-धन की रक्षा कर गो-वंश के सदुपयोग के आदिम-शिक्षक, कृषि-संस्कृति के प्रतीक-पुरोधा, धारा को उलट का राधा बनीं कृष्णान्~किसानों की साथी-संगी राधाओं के इष्ट-मित्र वासुदेव-कृष्ण के अंधकारमय रहे जन्मदिन की बहुत-बहुत मंगलकामनाएं!!...                गाय के साथ-साथ बैल-बछड़ों की रक्षा कर कृषि-संस्कृति को बचाने के निमित्त कृष्ण आपके हृदय में स्थान पाएं, इसकी शुभकामनाएँ!...                                                       ★★★★★