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Showing posts from May, 2019

किसानों पर आफ़त

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                                    किसानों पर आफ़त देश की रीढ़ कही जाने वाली हमारी खेती-बाड़ी पर बढ़ता ख़तरा हमारी ज़िंदगी पर, हमारे भविष्य पर मंडराने वाला शायद सबसे बड़ा खतरा है!... पिछले लगभग बीस सालों में उत्तर भारत के हरे-भरे खेतिहर मैदानों में नीलगाय, जंगली सूअर आदि बेतहासा बढ़े हैं। ये जंगली जानवर खेतों को बर्बाद करने के साथ-साथ जब तब इंसानों पर भी हमला करते हैं। आशंका व्यक्त की जा रही है कि सरकारों द्वारा बहुराष्ट्रीय कंपनियों को 'कॉरपोरेट खेती' करने की छूट देने के साथ-साथ किसानों की ज़िंदगी में इस तरह की आफत आई है।  जब अवध के इलाकों में जगह-जगह जंगल-झाड़ियां थीं तब भी इन जानवरों को कहीं नहीं देखा गया था। इनकी जगह पर अनेक दूसरे जानवर जैसे स्याही, सियार-गीदड़, लकड़बग्घे आदि जानवर थे जिनसे कम से कम खेती को कोई खतरा नहीं था।....वे आज कम हो रहे हैं। किंतु ये बड़े जानवर जिनके ठहरने के जंगली इलाके इन क्षेत्रों में प्रायः नगण्य हैं, बढ़ते जा रहे हैं और आये दिन खेती के साथ-साथ इंसानों ...

एक और कर्ण

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                  एक और कर्ण: किसी की तलाश है उसको                             बहुजन नेता कहाँ  रहते हैं? हमारे देश में हर एक को किसी न किसी की तलाश है!... ऐसी ही तलाश शायद पूरी दुनिया को भी हो!... वंचित समाज एक पूरा वंचित देश है, दुनिया है.  इन्हीं वंचितों में से है- एक और कर्ण !... उसे महाभारत के कर्ण की तरह न तो किसी राजा की तरह युद्ध में शामिल किया गया है, न ही उसकी कोई पहचान है. फिर भी वह हर कहीं दिख जाता है: जीवन बचाने का, अस्तित्त्व बचाने का संघर्ष करता हुआ!... एक युद्ध लड़ता हुआ!... महाभारत के कर्ण की तरह उसे दानवीर होने का कोई मुगालता नहीं!किन्तु वह  किसी से भीख भी नहीं मांगता!... वह जीवन जी सकने के एक ऐसे महाभारत में शामिल है जिसमें उसके सहयोगी केवल उसके  मां-बाप हैं. इस महाभारत के कर्ण की जमीन छीन ली गई।...शायद इसीलिए कि वह दलित समाज के कमजोर तबके का है!...उसकी कोई बहनजी या भाईजी, तथाकथित बहुजन-सर्वजन समाज का रानी या राजा ...

नीम का एक देवता

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                                  नीम का देवता                             एक ग्राम देवता की कहानी हमारे ग्राम देवता अनेक रूप धारण कर आते हैं।  इन देवताओं में देवियों के स्वरूप भी हैं और देवों के भी।  ये प्रायः इंसानों के सर पर सवार होकर आते हैं, पर कभी-कभी इनका अवतरण पौधो और जानवरों के रूप में भी होता है। https://youtu.be/7ISEjZDBK_M अलग-अलग इलाकों में वहाँ फैलने वाली बीमारियों, अक्सर आने वाली आपदाओं, अप्राकृतिक मौतों, मौसमी विपत्तियों और न समझ में आई वाली आसमानी या जमीनी हलचलों-हरक़तों के अनुसार इन देवताओं के स्वरूप बनते-बिगड़ते देखे जा सकते हैं। इन देवताओं की भगवानों की तरह कोई निश्चित कहानियाँ या गाथायें नहीं हैं। वे देश-काल के अनुसार निर्मित होती हैं। इनमें अनेक अलौकिक-आध्यात्मिक तत्त्वों के साथ-साथ भूत-प्रेत, पिशाच, बरमबाबा, डायन, डाकिन, चुड़ैल, जिन्न, माई, मूड़कट्टन आदि आधिभौतिक तत्त्वों का अस्तित...