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Showing posts from February, 2019

आत्मालाप-21: सपने कभी नहीं मरते...

                           सपने कभी नहीं मरते...                                                     - अशोक प्रकाश सपने कभी नहीं मरते इसलिए अनंत काल तक बिकते हैं बिकते रहते हैं... सपनों में राजा स्वर्ग से सफेद घोड़े पर आता है सपनों से भी तेज घोड़े को दौड़ाता है उसकी टापों के नीचे पड़ता जाता है लाल रंग का निशान किसी को वह फूल सा भाता है किसी को रक्त सा तड़पाता है... सपने कभी नहीं मरते सपनों में मारा जाता है राजा लोग देखते हैं राजा के महल हो गए हैं वीरान वीरानी के बीच अपने पुरखों के सपनों को ढूँढ़ते पहुँच रहे हैं इंसान... टिकट महँगा हो या सस्ता किलों के भीतर उठती आवाजों, रुलाइयों और कराहटों के बीच सुनाई पड़ती हैं किलकारियां राजा की बढ़ती हैं दुश्वारियां किलों में होते जाते हैं छेद किलों के खुलते जाते हैं भेद राजा ईश्वर नहीं व्यभिचारी था रक्त की बूंद-बूंद चूसता ...

बजट :3 : किसानों से ठगी- AIKMS

                'मोदी सरकार का अंतिम बजट 2019-20 -                                 देश के किसानों से ठगी' अखिल भारतीय किसान महासभा ने मोदी सरकार द्वारा आज पेश किए गए अंतरिम बजट में कृषि क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधानों को देश के किसानों के साथ एक ठगी करार दिया है। किसान महासभा के राष्ट्रीय महासाचिव कामरेड राजराम सिंह ने कहा कि किसानों की संपूर्ण कर्ज मुक्ति, उपज की लागत में C2+50℅मुनाफा के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य और उस पर किसानों की फसलों के खरीद की गारंटी के साथ ही किसानों को मिलने वाली सुविधाओं के दायरे में बटाईदारों और ठेके पर खेती करने वाले किसानों को शामिल करने जैसे सबसे महत्वपूर्ण सवालों पर मोदी सरकार का बजट खामोश है। उन्होंने कहा कि 5 एकड़ तक के किसानों को उनके खाते में वार्षिक 6000 रुपए की सहायता आत्महत्या के लिए मजबूर किसानों के साथ खुला मजाक है। जबकि तेलंगाना व उड़ीसा जैसे राज्य इससे कहीं ज्यादा सहायता पहले से ही किसानों को दे रहे हैं। यही नहीं यह...

बजट : 2 : चुनावी जुमला -एआईकेएमएस

बजट: 2019-20                                          चुनावी जुमला -                        खेती व बेरोजगारों को कोई राहत नही!                पहली बार किसी सरकार ने देश का बजट पेश किया पर उससे पहले देश को यह नहीं बताया कि उसके मूल्यांकन में देश के आर्थिक हालात क्या हैं। यह दिखाता है कि सरकार जनता से सच छिपाना चाहती है। बजट प्रस्ताव झूठ पर आधारित हैं और धोखा देने से प्रेरित हैं।                                  बजट में लघु व सीमान्त किसानों के लिए, यानि जो 5 एकड़ से कम के मालिक हैं, 6000 रुपये प्रति साल का आय/लागत सहयोग देने की घोषणा की है। यह ओडीशा में 10 व तेलंगाना में 8 हजार प्रति एकड़ के हिसाब से दिए गए सहयोग से बहुत कम है, लगभग उसका 1/8 व 1/6 है। एक-दो हेक्टेयर भूमि के मालिक के लिए यह सहयोग ...

बजट :1: किसका बिगड़ा, किसका बना

            लोकप्रिय बजट नहीं, लोकप्रियता के भ्रम का बजट                                                           - डी. एम. दिवाकर               भारत सरकार ने 2019-20 के लिए 2784200 करोड़ रुपये का अंतरिम बजट पेश किया है, जो मध्य वर्ग के लिए 5 लाख तक की कर छूट के संदर्भ में लोकप्रिय लगता है, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए  पेंशन, 6000 रुपये किसानों को वार्षिक आय का आश्वासन दिया है, लेकिन अगर कोई इससे थोड़ा आगे बढ़ कर देखता है तो  विभिन्न कर स्लैब में कोई बदलाव नहीं, छोटे और सीमांत किसानों की गरिमा के लिए महज 500 रुपये प्रति माह की आमदनी महज मजाक है.                      यदि हम गौर करें तो 2017-18 में शिक्षा पर कुल प्रस्तावित खर्च 3.74 प्रतिशत से 2018-19 में संशोधित बजट में घटकर  3.40 प्रतिशत ...

गरीबों के लिए शिक्षा:

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                प्राथमिक शिक्षा के प्रति उनका नकचढ़ापन!             प्राथमिक शिक्षा का जो हाल किया जा रहा है वह बाहर से कुछ और,  भीतर से कुछ और है! बाहर से तो दिख रहा है कि शासक-लोग गरीब जनता को अंग्रेजी पढ़ाकर उन्हें बड़ी-बड़ी कम्पनियों में नौकरी के लिए तैयार कर रहे हैं, पर हक़ीक़त में उनसे उनकी पढ़ाई-लिखाई की रही-सही संभावनाएं भी छीनी जा रही हैं। एक तरफ पूरी दुनिया की भाषाओं में हिंदी भाषा की रचनाओं के अनुवाद किए जा रहे हैं, गूगल से लेकर तमाम सर्च इंजन और वेबसाइटों द्वारा दुनिया की मातृभाषाओं के अनुसार अपने को ढालने और लोगों तक पहुंचने की कोशिशें की जा रही हैं, दूसरी तरफ हमारे देश में प्राथमिक शिक्षा के स्तर से ही उनकी मातृभाषा छीनने की कोशिश हो रही है।...             इस क्रम में उत्तर प्रदेश के 5000 हिंदी माध्यम के प्राथमिक विद्यालयों को खत्म कर उन्हें अंग्रेजी माध्यम में रूपांतरित करने की कार्रवाई को देखा जा सकता है। सरकार ने कोई अतिरिक्त अंग्रेज़ी के विद्यालय नहीं खोले बल्कि...