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Showing posts from May, 2020

केंद्रीय श्रमिक संगठनों का व्यापक प्रदर्शन

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प्रकाशनार्थ:           कामगारों की बढ़ती दुर्दशा के खिलाफ़                      देशव्यापी विरोध प्रदर्शन                      श्रम अधिकारों पर हमले के खिलाफ सभाएं दिल्ली:          श्रम कानूनों के खिलाफ  आहूत  व मासा द्वारा समर्थित देशव्यापी प्रदर्शन  के दौरान इंक़लाबी मज़दूर केंद्र,मज़दूर एकता समिति, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र,घरेलू कामगार महिला संगठन व परिवर्तनकामी छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने मज़दूर बस्ती शाहबाद डेरी में जुलूस निकाला और जगह जगह सभाएं कीं।  सभाओं के दौरान वक्ताओं ने जोशो खरोश के साथ श्रम कानूनों में संशोधन के खिलाफ नारे लगाए । सभा में वक्ताओं ने मोदी सरकार को पूंजीपतियों के इशारों पर नाचने का आरोप लगाते हुए श्रम कानूनों में संशोधनों को लॉक डाउन और मंदी से उत्पन्न संकट का बोझ मज़दूरों पर डालने की कवायद करार  दिया। वक्ताओं ने इसे आज़ाद भारत में मज़दूर वर्ग पर सबसे बड़ा हमला बताया।वक्ताओं ने मज़दूर...

रहम की उम्मीद, किससे?...

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आप उनसे रहम की कोई उम्मीद नहीं रख सकते जो मानते हैं कि सुख-दुःख सब पूर्वजन्म के कर्मों का फल है!..यह भी कि दुखी दुख लायक ही है और सुखी सुख के ही लायक! पूंजी के इस दर्शनशास्त्र को धर्म कहा जाता है।  आप विश्लेषण करेंगे तो पाएंगे कि अपराधियों का ऐसा ही नीतिशास्त्र  होता है जिसकी तराजू पर वे पूरे ब्रह्मांड को तौलते हैं। आप उसे अनीति-अधर्म-मूर्खता कहें-समझें तो उनकी बला से!..वे आपको भी कुछ नहीं सेटते!  ऐसा नहीं कि ये अनपढ़ हैं और इसे अनीति मानते हुए भी नीतिशास्त्र समझते हैं। ऐसा नहीं है, घण्टे भर पूजा करने के बाद वे मान लेते हैं की पापयोनि में पैदा हुए इस प्राणी को प्रभु समझते हैं और वह जो कुछ करता है उन्हीं के इशारे पर करता है। आखिर उनकी मर्जी के बगैर एक पत्ता भी तो नहीं हिल सकता!... इसलिए, अगर लॉकडाउन के चलते असहाय लोग छटपटाते हुए अपने घर पहुँचने की जद्दोजहद कर रहे हैं, रोते-चीखते बच्चे आपको भी रुला रहे हैं अथवा पैसा और/या शराब के नशे में नशेड़ी खाली सड़क को अपने बाप की  मान लोगों को रौंद रहे हैं तो इसे अस्वाभाविक मत मानिए! मूर्खों और अंधविश्वासियों को जब पूँजी का बल मिलता...