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शादीकार्ड की फजीहत

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                    विवाह का शुभकामना संदेश!       आजकल ज़्यादातर शादियाँ घर पर नहीं होतीं। प्रायः लोग कहीं कोई मैरिज होम/हाल बुक करते हैं। शायद इसीलिए कॉर्ड का चलन हुआ। ताकि पता लग सके कि आमंत्रितों को कहाँ जाना है।          अजीब बात है कि इसे इस बात से भी जोड़ दिया गया है कि किस रिश्ते को महत्व देना है, किसे नहीं। दामाद, बहनोई, मामा, फूफा, उनके नजदीकी रिश्तेदार, दोस्त-यार से होते हुए लिस्ट समाज के महत्त्वपूर्ण परिचित व्यक्तियों, काम में आने वाले या आ सकने वाले व्यक्तियों तक पहुँचती है। जातिगत रिश्तों में एम.पी.-एम.एल.ए., भूतपूर्व मंत्री-संत्री, मठाधीश, संस्थाओं के अध्यक्ष-मंत्री आदि विशेष आमंत्रित व्यक्ति होते हैं।              इधर कुछ सालों से वैचारिक रिश्तों को भी महत्व मिलने लगा है। अम्बेडकरवादियों और प्रगतिशीलों या मार्क्सवादियों के लिए यह बड़ा मुश्किल फैसला होता है। समाज ढकोसलों-आडम्बरों से भरा है, पर शादी-व्याह तो उसी समाज में करना है। जरूरी नहीं कि शादी वाला...

किसान आंदोलन की प्रतिबद्धता

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            किसान आंदोलन की प्रतिबद्धता                  किसान आंदोलन की प्रतिबद्धता सचमुच यह एक अद्भुत प्रतिरोध है! इसकी मिसाल इस शताब्दी के शुरुआती दिनों में तो नहीं ही देखी जाती, पिछली शताब्दी में भी इसकी ज़्यादा मिसालें नहीं हैं। कहने वाले कुछ भी कहें 'सरकार की नकेल में नथ' डालने का काम तो इसने किया ही है!..लेकिन सरकार सिर्फ पुलिस और अफसर ही तो नहीं होते। उनके भी ऊपर बड़े सरकार हैं। और वे कोई नेता नहीं हैं। देशी-विदेशी पूंजी के घाघ हैं, बड़ी-बड़ी कम्पनियों के मालिक हैं, पूँजीपति हैं! यद्यपि पूँजीपतियों ने इसका मतलब यही निकाला होगा कि देश की प्राकृतिक संपदा से मुनाफ़ा उठाने में उन्हें अब अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। क्योंकि उनका काम तो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष अबाध गति से चल ही रहा है। तीनों कृषि संबंधी कानून लाने का मक़सद भले ही बेनकाब हो गया हो पर कृषि-उपज का खरीदना-बेचना, खेती को ठेके पर लेने के लिए अनुबंध करना, सस्ते में खरीदारी और कुछ समय बाद बिक्री- माल रोककर महंगा करना तथा फिर जिंस बाज़ार से मनमर्जी मुनाफ़ा कमान...