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Showing posts from July, 2018

विद्यालयों में गायत्री-मंत्र:

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                      विद्यालयों में अनिवार्य  गायत्री-मन्त्र                          अंधविश्वास का विनाश या विकास               क्या आप   'आइए, अंधविश्वास खत्म करें! ' के दिव्य उद्घोष के साथ अंधविश्वास फैलाने का 'श्रीगणेश' कर सकते हैं?...  उत्तर देने या हाँ-ना कहने के पहले कुछ देर  सोचिए जरूर!                            क्या उत्तर मिला?...            जी, मुझे तो इसका उत्तर 'हाँ!' मिला है। मिला ही नहीं, बाकायदे घोषणा की गई है, आदेश निकाला गया है कि अंधविश्वास से लोगों को बचाने के लिए लोगों को 'गायत्री मंत्र' का जाप करना होगा!...वह भी बच्चों को! ये कौन सी उलटबांसी है? कहते हैं कि किसी जमाने में लोग मन्त्र पढ़कर आग जला देते थे, पानी बरसा देते थे, तूफान ला देते थे!...क्या आप इस पर विश्वास करते हैं?...तब ...

तैयार है विपक्ष:

 'विपक्ष' की बहुप्रचारित अवधारणा से अलग; सांसदों-विधायकों की दुनिया से कोसों दूर; चमचमाती कारों, लकदक कुर्तों, आगे-पीछे पुलिस और चमचों से भिन्न देश में एक अन्य विपक्ष भी है! जनता के  रूप में मरते-खपते इस विपक्ष की भूमिकाएँ प्रायः किसी भी चुनाव के बाद नहीं बदलतीं। इसे सरकारें तब तक महत्त्व नहीं देतीं जब तक कि इसका आक्रोश सड़कों, खेतों, कारखानों में फुट नहीं पड़ता। फिर इसे 'हिंसक भीड़', 'शरारती तत्त्व', 'अराजकतावादी', 'उग्रवादी' जैसे कई नामों से पुकारा-प्रचारा जाने लगता है। संदीप खरे ने ऐसे ही विपक्ष को 'तैयार है विपक्ष' कविता में ढालने की कोशिश की है। पढ़ें:...                                   तैयार है विपक्ष …                                                     -  संदीप खरे तैयार है, विपक्ष...   खेतों की मेड़ पर  कारखानों के गेट पर  च...

उच्च-शिक्षा: भारतीय उच्च शिक्षा आयोग का अवतरण

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                 विश्वविद्यालय अनुदान आयोग समाप्त कर       भारतीय उच्च-शिक्षा आयोग के गठन पर कुछ टिप्पणियां           ★  केन्द्रीय उच्च शिक्षा मन्त्रालय देश के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को सरस्वती शिशु मंदिर में बदल देने की योजना में प्रतिबद्ध दिखता है। मोदी सरकार ने अपने पिछले चार साल के कार्यकाल में यू.जी.सी को एक पैसा भी बजट आवंटन नहीं किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बसे सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में बिल्डिंग, लैब,लाइब्रेरी, कम्प्यूटर इत्यादि की जो भी सुविधाएं आज दिख रहीं है,वह सब यू.जी.सी के अनुदान से ही सम्भव हो सकी हैं,और यह सब कांग्रेस के कार्यकाल की देन रही है। मोदी सरकार उच्च शिक्षा को प्राइवेट धनपशुओं के हाथों में सौंप देने का षडयंत्र कर रही है। डा.ज़ाकिर हुसैन से लेकर कपिल सिब्बल तक उच्च शिक्षा हमेशा देश के पढ़े,लिखे और नामचीन विद्वानों के हाथ रही है।मोदी सरकार में पहली बार उच्च शिक्षा मात्र इन्टर और बी.ए.पास मूर्खों के हाथ आयी है। योजना आयोग को बदलकर नीति आयोग बना कर म...