Posts

Showing posts from January, 2018

माटी के गीत-2:

Image
                                                                                           अवधी भाखा कै कविताई,                            कइसे न पढ़ै कै मन ललचाई!...  ★ अमरेंद्र अवधिया कै दुइ कविता: (१) बसंत पंचमी कै सुभकामना! सिरसई कै डारी लउँचि उठी बरगद बाबा मुसक्याइ दिहिन पिपरे कै बरम सवाँचि उठे अमऊ डउँगी पुलक्याइ दिहिन। ताले पै धूप परी जइसे नैनू रचि जाय गदोरी पै गोरू-बछरू चिरई-परई हुलसै लागे सब ओरी कै। यक चाँद सुरतिया गमकि उठी सगरौ सेवान हरखाय गवा कुछ कसक उठा कुछ मसक उठा कुछ ऊभ-चूभ सुधियाय गवा.. (२) कवन सपेरा : कवन सपेरा बीन बजावै न्याव, प्रसासन, बिधि-बिधायिका : सबका नाच नचावै जाति-धरम चिनगी परचावै, धूँ-धूँ लपट उठावै बेकारन क भाँगि क गोला, टूका दयि ...

गणतंत्र दिवस:

Image
                                            गणतन्त्र-दिवस की शुभकामनाएं! हर बार गणतंत्र-दिवस के शुभ-अवसर पर नागार्जुन की यह कविता हमें बहुत-कुछ याद दिलाती है! अब भी यह वैसी ही समीचीन लगती है!...क्या सचमुच इसकी प्रासंगिकता कभी कम न हो पाएगी?...                         🔴  किसकी है जनवरी...  🔴                                                         -नागार्जुन किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है? कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्त है? सेठ है, शोषक है, नामी गला-काटू है गालियां भी सुनता है, भारी थूक-चाटू है चोर है, डाकू है, झूठा-मक्कार है कातिल है, छलिया है, लुच्चा-लबार है जैसे भी टिकट मिला, जहां भी टिकट मिला शासन के घोड़े पर वह भी सवार है उसी की जनवरी छब्बीस उ...

आया वसंत!:

Image
                              वसंत पर चार कविताएँ         साभार: राजकमल प्रकाशन सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला': सखि, वसंत आया भरा हर्ष वन के मन नवोत्कर्ष छाया सखि, वसंत आया! किसलय-वसना नव-वय-लतिका मिली मधुर प्रिय उर तरु-पतिका, मधुप-वृन्द बंदी पिक-स्वर नभ सरसाया सखि, वसंत आया! लता-मुकुल हार गंध-भार भर, बही पवन बन्द मन्द मन्दतर जागी नयनों में वन- यौवन की माया सखि, वसंत आया! आवृत सरसी उर सरसिज उठे केशर के केश कली के छुटे स्वर्ण शस्य अँचल पृथ्वी का लहराया सखि, वसंत आया! ■ सोहनलाल द्विवेदी: सरसों खेतों में उठी फूल बौरें आमों में उठीं झूल बेलों में फूले नये फूल पल में पतझड़ का हुआ अंत आया वसंत आया वसंत। लेकर सुगंध बह रहा पवन हरियाली छाई है बन बन, सुंदर लगता है घर आँगन है आज मधुर सब दिग दिगंत आया वसंत आया वसंत। भौरे गाते हैं नया गान, कोकिला छेड़ती कुहू तान हैं सब जीवों के सुखी प्राण, इस सुख का हो अब नही अंत घर-घर में छाये नित वसंत। ■ सुमित्रान...

एक कविता: वे तुमको गोली मारेगें

                                 वे तुमको गोली मारेगें!..                                                            - नागार्जुन बापू की प्रतिमा वाली बटनें चमकाते फौजी वर्दी में तानाशाह पधारेंगे, सच बोलोगे तो जीभ काट ली जायेगी चौराहे पर वे तुमको गोली मारेंगे। सैनिक अदालतों में जज होंगे अभिनेता तब घुट घुट कर इंसाफ गुहार लगाएगा, भू पर आते यम की नानी सकुचायेगी नंगा असत्य हिंसा से ब्याह रचायेगा। जय वीर गोडसे की ध्वनियाँ मुखरित होंगी छात्रो,श्रमिकों, का लहू बहाया जायेगा, मार्शल ही होंगे हिटलर के नाती-पोते पार्टी विहीन जनतन्त्र रंग दिखलायेगा।                                            ★★★★★  

उच्च-शिक्षा- 5: उत्तर प्रदेश

                                               उत्तर प्रदेश में उच्च-शिक्षा का खेल                                                                                प्रस्तुति: -  डॉ. राजेश चन्द्र मिश्र             विश्वविद्यालयों, अखबार और संचार माध्यमों की विभिन्न सूचनाओं के अनुसार उत्तर प्रदेश में लगभग 6000 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय है, किन्तु उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश शासन की अपुष्ट सूचनाओं के अनुसार 3016 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय हैं! महाविद्यालयों की सुनिश्चित सूचना के अभाव में इनकी संख्या को लेकर कई संदेह और शंकाएँ पैदा होती हैं!...             कुछ उदाहरणों से इसे समझ जा सकता है: ● इसे उच्च शि...

माटी के गीत-१ :

बघेली किसानी-गीत:               'पानी परिगा, पथरा परिगा सरि  गई सगरी पियाजु                        किसनवा कै मरही होइ गै रे!..' देश का किसान आज एक अभूतपूर्व स्थिति से गुज़र रहा है। जहां भूमिहीन किसान-मजदूर शहरों की तरफ भाग कर दिहाड़ी-मज़दूर बनकर जैसे-तैसे ज़िन्दगी काटने को मजबूर हैं, वहीं छोटे-मझोले किसान खाद-बीज-पानी-बिजली के अलावा कर्ज़ के शिकार होने के कारण लगातार बदहाल हो रहे हैं!...         ऐसी ही स्थितियों को बयां करता है बघेली का यह मार्मिक किसानी-गीत:                                               साभार -राजेश मिश्र, यू-ट्यूब

श्रद्धांजलि: दूधनाथ सिंह

                                                  श्रद्धांजलि: प्रो.दूधनाथ सिंह वे एक अलग अध्यापक थे! उनकी कक्षा में कोई विद्यार्थी बोर नहीं महसूस करता था। अपनी स्पष्ट समझ और धारदार शैली से वे हम सबके प्रिय अध्यापकों में से थे!...हम सब इंतज़ार करते कि प्रेमचंद पढ़ते हुए हमें अपने गाँव-गिरांव की सैर करने के अलावा और बहुत कुछ मिलेगा! गोदान- किसी होरी की कथा-व्यथा नहीं है, यह सामंती व्यवस्था की प्रतिकार-कथा है! मेहता-मालती कोई श्रेष्ठ बुद्धिजीवी पात्र नहीं हैं, वे समाज के उस मध्यवर्ग के प्रतिनिधि हैं जिसे मार्क्स ने समाज का थूक कहा है!...उनके ये शब्द मुझे आज भी नहीं भूलते!          उनकी कक्षा हमेशा उत्तेजना पैदा करने वाली होती। निराला के प्रति विद्यार्थियों के पूज्य-भाव को तोड़कर उनकी कविताओं के संघर्ष से वे उन्हें रूबरू कराते! विश्वविद्यालय से बेहतर उनके घर पर हम जैसों की क्लास होती!...            'निराला:आ...

उच्च शिक्षा-4: चिट्ठी एक शिक्षक की-

                                      सुदामा-शिक्षक की                                         एक ठो विनती                                                               -डॉ. राजेश चंद्र मिश्र सेवा में, कुलपति जी सिद्धार्थ विश्विद्यालय, कपिलवस्तु,सिद्धार्थनगर                   सिद्धार्थ विश्विद्यालय से सम्बद्ध लगभग 265 महाविद्यालयों में सबसे ज्यादा लगभग 65 महाविद्यालय संतकबीरनगर में है।कई वर्षों से जनपद के सभी महाविद्यालयों की बीएड  परीक्षाएं हमारे कॉलेज ही. रा. पी.जी कॉलेज,संतकबीरनगर में नकलविहीन और शुचितापूर्वक हो रही है।  इधर 19 दिसम्बर 2017 से  आज दिनाँक 9 जनवरी 2018 ...

शिक्षा की अनोखी रोशनी:

Image
                                              शेख़ फ़ातिमा:                                   एक अनोखी शिक्षक                                                                                             -अशोक प्रकाश                               आज यह बड़ी साधारण बात लग सकती है!...दलित-मुस्लिम लड़कियों का पढ़ना-लिखना, बड़े-बड़े पदों को सुशोभित करना-आज यह सब कोई अजूबी बात नहीं लगती।यद्यपि आज भी वास्तव में यह बिल्कुल आम बात नहीं है। खासकर, गरीब घरों की लड़कियों के लिए पढ़ाई-लिखाई आज भी एक मुश्...

एक नज़्म:

                                    सर्दी का तोहफ़ा     इस सख़्त सर्दी में दोस्तों के लिए एक दोस्त बाबर नक़वी साहब का भेजा एक गर्मा गर्म तोहफ़ा.... साग़र ख़ैयामी की एक नज़्म! ऐसी सर्दी न पड़ी ऐसे न देखे जाड़े दो बजे दिन को अज़ाँ देते थे मुर्गे सारे एक शायर ने कहा चीख़ के साग़र भाई उम्र में पहले पहल चमचे से चाए खाई। आग छूने से भी हाथों में नमी लगती है सात कपड़ों में भी कपड़ों की कमी लगती है वक़्त के पाओं की रफ़्तार थमी लगती है रास्ते में कोई बारात जमी लगती है जम गया पुश्त पे घोड़े की बेचारा दूल्हा खोद के खुरपी से साले ने उतारा दूल्हा। कड़कड़ाते हुए जाड़ों की क़यामत तौबा आठ दिन कर न सके लोग हज़ामत तौबा सर्द था उन दिनों बाज़ार-ए-मोहब्बत तौबा कर के बैठे थे शरीफ़ा से शराफ़त तौबा वो तो ज़हमत भी क़दमचों की न सर लेते थे जो भी करना था बिछौने पे ही कर लेते थे। सर्द गर्मी का भी मज़मून हुआ जाता था जम के टॉनिक भी तो माज़ून हुआ जाता था जिस्म लरज़े के सबब नून हुआ जाता था ख़ासा शायर भी तो मजनून हुआ जाता था...

शख़्सियत (अलीगढ़): गोपाल दास 'नीरज'

Image
                                गोपालदास 'नीरज ' खुशबू-सी आ रही है इधर ज़ाफ़रान की, खिड़की खुली है ग़ालिबन उनके मकान की हारे हुए परिन्दे ज़रा उड़ के देख तो, आ जायेगी ज़मीन पे छत आसमान की बुझ जाये सरेशाम ही जैसे कोई चिराग़, कुछ यूँ है शुरुआत मेरी दास्तान की ज्यों लूट लें कहार ही दुल्हन की पालकी, हालत यही है आजकल हिन्दोस्तान की औरों के घर की धूप उसे क्यूँ पसंद हो बेची हो जिसने रौशनी अपने मकान की जुल्फ़ों के पेंचो-ख़म में उसे मत तलाशिये, ये शायरी जुबां है किसी बेजुबान की 'नीरज' से बढ़कर और धनी कौन है यहाँ, उसके हृदय में पीर है सारे जहान की!..                                            ●●●●

एक कविता: सबसे खतरनाक ...

Image
          सबसे ख़तरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना                                                       -अवतार सिंह पाश श्रम की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती ग़द्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती बैठे-सोए पकड़े जाना – बुरा तो है सहमी-सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो है पर सबसे ख़तरनाक नहीं होता कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना बुरा तो है किसी जुगनू की लौ में पढ़ने लग जाना – बुरा तो है भींचकर जबड़े बस वक्‍त काट लेना – बुरा तो है सबसे ख़तरनाक नहीं होता सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शान्ति से भर जाना न होना तड़प का, सब सहन कर जाना, घर से निकलना काम पर और काम से लौटकर घर आना सबसे ख़तरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना सबसे ख़तरनाक वह घड़ी होती है तुम्हारी कलाई पर चलती हुई भी जो तुम्हारी नज़र के लिए रुकी होती है सबसे ख़तरनाक वह आँख होती है जो सबकुछ देखती ह...

एक कहानी:

                लिंचिस्तान : दुनिया के196वें देश की खोज                                                -चन्दन पांडेय (प्रस्तुति)                   इस बीच दुनिया में एक नए देश की तलाश हुई है। सबने अपने ज़मीर और दूसरे मनुष्यों को मार कर इस देश का निर्माण किया है। आइए देखें, कैसा है हत्यारों का यह राष्ट्र यानी देश!... लिंचिस्तान की भूगोलगाथा: लिंच अंग्रेजी का एक क्रिया पद है। शब्दकोष के अनुसार Lynch का अर्थ बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के किसी समूह द्वारा हत्या करना होता है। इसका समरूप है, हैंग। हिंदी में इसे हत्या कहते हैं। लिंचिस्तान आधिकारिक तौर पर विश्व के सभी देशों की सूची में एक सौ छियानबे के क्रम पर है. इसका नाम भी इसके गुणों के आधार पर पड़ा. जैसे जहाँ कज्जाक रहते हैं उसे कजाकिस्तान कहते हैं, जहाँ उजबेक रहते हैं उसे उज्बेकिस्तान कहते हैं, वैसे ही जहाँ अपने ही पड़ोसी को लिंच ...

सावित्रीबाई फुले:

Image
   सावित्रीबाई फुले:  187वाँ जन्म-दिवस          समाज सुधारक और शिक्षिका सावित्रीबाई फुले का  जन्म 3 जनवरी, 1831 को हुआ था। 170 साल पहले सन 1848 में दकियानूसी, रूढ़िवादी और पुरोगामी ब्राह्मणवादी ताकतों से वैर मोल लेकर पुणे के भिडेवाडा में *सावित्रीबाई और ज्योतिबा फुले ने लड़कियों के लिए देश का पहला स्कूल खोला था। भारत में लम्बे समय तक दलितों व स्त्रियों को शिक्षा से वंचित रखा गया था।* ज्योतिबा व सावित्रीबाई ने इसी कारण वंचितों की शिक्षा के लिए गम्भीर प्रयास शुरू किये। मनुस्मृति के अघोषित शिक्षाबन्दी कानून के विरूद्ध ये जोरदार विद्रोह था। इस संघर्ष के दौरान उन पर पत्थर, गोबर, मिट्टी तक फेंके गये पर सावित्रीबाई ने शिक्षा का महत्वपूर्ण कार्य बिना रुके निरन्तर जारी रखा। फ़ातिमा शेख़ और उनके परिवार ने इस काम में फुले दम्पत्ति का पूरा साथ और सक्रिय सहयोग दिया।  शिक्षा के क्षेत्र में इतना क्रान्तिकारी काम करने वाली सावित्रीबाई का जन्मदिवस ही *असली शिक्षक दिवस* होना चाहिए पर ये विडम्बना है कि एक ऐसे व्यक्ति का जन्मदिवस शिक्षक दिवस ...

नया साल-2018:

Image
                           नव-वर्ष की  शुभकामनाएं! कुछ भावनाएं: सोहन लाल द्विवेदी- स्वागत! जीवन के नवल वर्ष आओ, नूतन-निर्माण लिए इस महाजागरण के युग में जाग्रत जीवन-अभिमान लिए; दीनों-दुखियों का त्राण लिए मानवता का कल्याण लिए, स्वागत! नवयुग के नवल वर्ष! तुम आओ स्वर्ण-विहान लिए। संसार क्षितिज पर महाक्रान्ति की ज्वालाओं के गान लिए, मेरे भारत के लिए नई प्रेरणा नया उत्थान लिए; मुर्दा शरीर में नए प्राण प्राणों में नव अरमान लिए, स्वागत! स्वागत! मेरे आगत! तुम आओ स्वर्ण-विहान लिए! युग युग तक पिसते आए कृषकों को जीवन-दान लिए, कंकाल-मात्र रह गए शेष मजदूरों का नव त्राण लिए! श्रमिकों का नाव संगठन लिए, पददलितों का उत्थान लिए; स्वागत!स्वागत! मेरे आगत! तुम आओ स्वर्ण-विहान लिए! सत्ताधारी साम्राज्यवाद के  मद का चिर-अवसान लिए, दुर्बल को अभयदान, भूखे को रोटी का सामान लिए! जीवन में नूतन क्रांति लिए क्रांति में नए-नए बलिदान लिए, स्वागत! जीवन के नवल वर्ष आओ, तुम स्वर्ण-विहान लिए! ■ ◆...