आत्मालाप-1 : मुखौटा
🔴 मुखौटा...🔴
-अशोक प्रकाश
मुखौटे में कितनीे जान है?
जादूगर असली शैतान है!
भले ही चीखता-चिल्लाता है मुखौटा
भले ही हँसता है मुस्कराता है मुखौटा
भले ही शक्तिमान कहलाता है मुखौटा
अंदर-अंदर पूंछ हिलाता है मुखौटा!
मुखौटा मुखौटा है, कल और आएगा
पूँछ नहीं हिलाया, तो बदल जाएगा
ज़्यादा से ज़्यादा जूठन ही पाएगा
लाखों-करोड़ में कुछ करोड़ खाएगा!
ऐसा भी नहीं कि यह मुखौटा बेकार है
मालिकों का ये भी अच्छा चौकीदार है
सत्ता में इसीलिए लगातार बरकरार है
लोग भी सोचते हैं कि यही सरकार है!
यही तो चाहते और करते हैं जादूगर
मुखौटे के पीछे हाथ रखते हैं जादूगर
गुनाहों से इस तरह बचते हैं जादूगर
खुद मुखौटे में छिपे रहते हैं जादूगर!
सोए हुए हो अब खोलो आँख, जागो
मुखौटे में दम नहीं है, पीछे मत भागो
असली जादूगर पहचानो हिसाब मांगो
जादूगरी को समझो इसे सूली पे टांगो!
🔴🔴 🔴🔴
केवल मुखौटा नहीं होते नेता!...
ReplyDeleteकेवल मुखौटा नहीं होते नेता!...
ReplyDeleteहर आदमी में होते है दस बीस आदमी
ReplyDeleteजिसको भी देखना हो कई बार देखना....
जी,पता ही नहीं चलता आदमी आदमी है या मुखौटा!...खासकर जब वह आदमी आम आदमी से बहुत दूर हो, मुखौटा ही लगता है!
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