हम देश, हमारा देश- 1: ऐ बनारसी विकास
ऐ बनारसी विकास!..
सुनकर बहुत बुरा लगता है, सोचकर और भी बुरा!...पर क्या आम इंसान के दिल से यही आह नहीं निकलती?...विकास की बलिवेदी पर न जाने कितने चढ़े हैं, न जाने कितने चढ़ाए गए हैं, पर क्या कोई उन बेमौत मारे गए लोगों के घरवालों को कभी संतुष्ट कर पाएगा कि 'विकास' के लिए कुछ लोगों की बलि कोई खास बात नहीं?...पर ऐसा इस देश में होता रहा है। लोग बलि चढ़ाए जाते रहे हैं। शायद ऐसे लोगों के लिए ही यह परिकल्पना गढ़ी गई है- ' उसकी मर्ज़ी के बगैर पत्ता भी नहीं हिलता, इसलिए किसी को दोष मत दो!'
'अमर उजाला' के पत्रकार अजय राय इसका जवाब कुछ इस तरह देते हैं!...इंजीनयर अपना शास्त्र लेकर सर के बल खड़े हो जाएं तब भी नहीं बता पाएंगे कि चौकाघाट पुल के बीम गिरे क्यों। दरअसल बीम इंजिनीयरिंग की गलती से गिरा ही नहीं। यह पुलिस के भ्र्ष्टाचार और वसूली के चलते गिरा।
पुलिस चांदपुर चौराहे और लहरतारा पर पैसे लेकर 35-40 ओवरलोड बालू की ट्रकों को रात में 10 रोज से इस रास्ते से भेज रही थी। इनके कम्पन से बीम खिसक गया और गिरा। खतरा अभी टला नहीं है। और भी बीम खिसकी हो सकती हैं।
पुलिस ने मंडुआडीह में हल्के वाहनों के लिए बने रेलवे ओवरब्रिज से ऐसे वाहनों को भेजना शुरू किया था। इससे वहां मकान हिलते थे। स्थानीय निवासियों ने इसकी शिकायत अमर उजाला के सम्पादक से की थी। उन्होंने इसका संज्ञान लिया और खबरों के जरिये हस्तक्षेप करके इस अवैध पुलिसिया कारगुजारी को बंद कराया।
मंडुआडीह से ट्रक रुकने के बाद पुलिस ने उन्हें बरास्ते कैंट भेजना शुरू कर दिया। जहां बीम गिरा है वहां पुल और एईएन कॉलोनी के क्वार्टर के बीच बहुत कम जगह है, जिससे कम्पन का असर ज्यादा हुआ।
पुलिस की संगठित लूट का प्रमाण यह है कि ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद रोडवेज तक डग्गामार वाहन चलते हैं। नेहरू मार्केट के पास तो इलाहाबाद से आने वाली बसों का अड्डा बना दिया गया है। पहले इन बसों को चांदपुर में ही रोक दिया जाता था। बस ऑपरेटरों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक से बसों को शहर से बाहर रोकने की शिकायत की थी पर कोई सुनवाई नहीं हुई थी। इस बारे में मौजूदा एसपी ट्रैफिक का कहना था कि इन बसों का कैंट तक का परमिट है तो वहा आने से कैसे रोक सकते हैं। क्या ऐसा कोई परमिट बनता है? और वह भी नेशनलाइज रूट पर ? अगर ऐसा है तो कोई बताए कि परिवहन राज्यमंत्री ने डग्गेमारी रोकने में रोडवेज के आरएम को विफल मानकर निलंबित क्यों किया था?...
सवाल बहुत हैं और जवाब भी बहुत! पर उन ज़िन्दगियों का क्या जिन्हें इन अनंत काल तक चलने वाले सवालों-जवाबों से कुछ लेना-देना नहीं?... ★★★


एकदम सही बिशलेषन है
ReplyDeleteजी, यही विडंबना है हमारे इस तथाकथित विकास की। यह आम आदमी के हितों की जगह जन-विरोधी शक्तियों के हितों को महत्त्वपूर्ण मानकर चलता है। इसीलिए जनता को ऐसे भयानक मंज़र भी झेलने-देखने पड़ते हैं!...
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