चंद्र पर भूमि-अधिग्रहण


                       एक रेड इन्डियन और नील आर्मस्ट्रोंग 
       
                                                प्रस्तुति: धीरज राठौड़

               विश्व आदिवासी दिन पर गुजरात युनिवर्सिटी में हुए एक दिवसीय सेमिनार में वनराज पारगी ने अपने वक्तव्य के समापन में बडी हसानेवाली पर भूमिगत यथार्थ से भरी बात कही.
चन्द्र पर जाने से पहसे नील आर्मस्ट्रोंग दूर सुदूर किसी जगह पर चन्द्र पर क्या किया जाये उसकी तालीम ले रहे थे. काफी वक्त से देख रहे एक रेड इन्डियन ने नील आर्मस्ट्रोंग से पूछा, 
'यह आप लोग क्या कर रहे हो?'
आर्मस्ट्रोंग :
'हम चन्द्र पर जाने वाले हैं, वहां जाके क्या करना है उसकी तालीम ले रहे हैं.'
रेड इन्डियन : 
'अरे! चन्द्र पर तो हमारे पूर्वज रहते है.'
आर्मस्ट्रोंग : 'अच्छा!
रेड इन्डियन : 
'हां, अब आप जा रहे हैं तो मेरे पूर्वजों तक मेरा एक संदेशा पहुंचायेंगें?'
आर्मस्ट्रोंग : 'जरुर.'
रेड इन्डियन ने अपनी आदिवासी भाषा में दो वाक्य कहें. आर्मस्ट्रोंग ने उसे ठीक से याद कर लिया, रट्टा लगा लिया. कुछ अरसे बाद आर्मस्ट्रोंग को उसका अर्थ जानने की इच्छा हुई. भाषाविद के साथ एक रेड इन्डियन को भी बुलाया गया. उनके सामने आर्मस्ट्रोंग ने रेड इन्डियन के संदेशे के दो वाक्य कहें. सुनते ही दूसरा रेड इन्डियन पेट दबाके हंसने लगा. देखकर आर्मस्ट्रोंग ने पूछा,
'क्यूं हंस रहे हो?'
रेड इन्डियन : 
'दो वाक्य सुनकर.'
आर्मस्ट्रोंग :
'हसनेवाली एेसी क्या बात है इसमें?'
रेड इन्डियन : 
'उसने अपने पूर्वजों को संदेशे में कहा है कि,
"इन लोगों का कभी भरोसा मत करना. यह लोग आपकी जमीन भी हथिया लेंगे."     ★★★

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