केंद्रीय श्रमिक संगठनों का व्यापक प्रदर्शन
प्रकाशनार्थ:
कामगारों की बढ़ती दुर्दशा के खिलाफ़
देशव्यापी विरोध प्रदर्शन
श्रम अधिकारों पर हमले के खिलाफ सभाएं
दिल्ली:
श्रम कानूनों के खिलाफ आहूत व मासा द्वारा समर्थित देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान इंक़लाबी मज़दूर केंद्र,मज़दूर एकता समिति, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र,घरेलू कामगार महिला संगठन व परिवर्तनकामी छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने मज़दूर बस्ती शाहबाद डेरी में जुलूस निकाला और जगह जगह सभाएं कीं।
सभाओं के दौरान वक्ताओं ने जोशो खरोश के साथ श्रम कानूनों में संशोधन के खिलाफ नारे लगाए ।
सभा में वक्ताओं ने मोदी सरकार को पूंजीपतियों के इशारों पर नाचने का आरोप लगाते हुए श्रम कानूनों में संशोधनों को लॉक डाउन और मंदी से उत्पन्न संकट का बोझ मज़दूरों पर डालने की कवायद करार दिया। वक्ताओं ने इसे आज़ाद भारत में मज़दूर वर्ग पर सबसे बड़ा हमला बताया।वक्ताओं ने मज़दूरों की व्यापक संग्रामी एकता के बल पर श्रम कानूनों में घोर मज़दूर विरोधी संशोधनों की खिलाफत करने का संकल्प व्यक्त किया।
अंत में कार्यक्रम का समापन इंक़लाबी मज़दूर केंद्र के कार्यालय पर एक क्रांतिकारी गीत "जाम करो मिलके ये शोषण का पहिया,मालिकों से लड़ने को एक एक हो जा भईया।" गाकर और जोरदार नारेबाजी के साथ हुआ।
कार्यक्रम के दौरान मास्क व फिजिकल डिस्टेनसिंग के तहत उचित दूरी बनाए रखने का पालन किया गया।
प्रतापगढ़, उ. प्र. :
केंद्रीय श्रम संगठनों केंद्र व राज्य कर्मचारी बैंक कर्मियों स्वतंत्र फेडरेशनों ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर आज दिनांक 22 मई 2020 को देशव्यापी विरोध दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय पर बलीपुर में सांकेतिक धरना शारीरिक दूरी के साथ किया गया। धरना स्थल पर वक्ताओं ने अपने विचार भी रखें वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि हमारे देश व प्रदेश में कोविड-19 के चलते 25 मार्च से ही लाकडाउन चल रहा है। लाकडाउन के समय से ही मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र व राज्य सरकारों ने दिशा निर्देश निर्गत किया जिसका पालन उद्योगपतियों व मालिकों ने नहीं किया। उल्टे मालिको व उद्योगपतियों के संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाकर और अधिक सुविधा लेने का प्रयास किया। और अब सरकार के द्वारा उठाए गए कदम यह प्रमाणित करते कि वह पूँजीपति-परस्त है। कर्मचारियों के महंगाई भत्ता पेंशनरों के महंगाई राहत सहित आठ प्रकार के भत्ते समाप्त कर दिए गए हैं, काम के घंटे बढ़ा दिए गए, श्रम कानूनों को 3 साल के लिए स्थगित कर दिया गया ,श्रम कानूनों को संशोधित करने का प्रयास शुरू हो गया है, बिजली रक्षा कोयला तेल व रेल जैसी कंपनियों को जो सार्वजनिक क्षेत्र की हैं उनके निजीकरण कोविड-19 के राहत के साथ शुरू कर दिया है जो सरकार का अत्यंत ही मजदूर विरोधी कदम है। ऐसे समय में जबकि पूरा देश एक बड़ी आपदा का मुकाबला कर रहा है, मजदूर बेहाल व् परेशान है, ऐसे में सरकार सार्वजनिक क्षेत्र - सरकारी विभागों के कर्मचारी बढ़-चढ़कर जनता की सेवा कर रहे हैं, सरकार कर्मचारियों और मजदूरों के पीठ पर वार कर रही है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिसमें श्रम कानूनों को 3 साल स्थगित करनेके निर्णय को वापस लेने , राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ता व पेंशन पाने वालों के महंगाई राहत सहित समाप्त किए गए 8 भत्तो को बहाल करने ,आयकर न देने वाले देश के सभी परिवारों को रूपये पचहत्तर सौ आर्थिक सहायता देने ,करोना से मुकाबला कर रहे कर्मचारियों ,स्वास्थ्य कर्मी ,सफाई कर्मी ,आंगनबाड़ी ,बैंक कर्मी ,बिजली कर्मी ,पुलिसकर्मी आदि को आवश्यक सुरक्षा उपकरण आवश्यकतानुसार उपलब्ध कराएं जाने ,सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से सभी को 3 महीने के मुफ्त राशन उपलब्ध कराए जाने, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योगों को विशेष पैकेज दिए जाने ,बिजली सहित तमाम सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के निजी करण करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने, प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक निशुल्क भेजने , सड़क हादसों में मारे गए प्रवासी श्रमिकों को मुआवजा देने की मांग की गई ज्ञापन में स्थानीय मांग के रूप में जनपद प्रतापगढ़ में उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अधीन पंजीकृत श्रमिकों को घोषणा के बावजूद श्रम विभाग के द्वारा खातों में गड़बड़ियों के चलते अधिकतर पंजीकृत श्रमिकों के खातों में धनराशि नहीं गई, खातों को ठीक करके धनराशि भेजे जाने प्रतापगढ़ के नगरीय क्षेत्रों में पल्लेदारों को दिहाड़ी मजदूर के रूप में चिन्हित नहीं किया गया है और उन्हें दिहाड़ी मजदूर के नाम पर मिलने वाली सहायता नहीं मिली है को दिलाए जाने एवं जनपद के सभी परिवारों को राशन कार्ड दिए जाने ,मनरेगा के तहत सभी श्रमिकों के जाबकार्ड बनाए जाने व काम उपलब्ध कराए जाने , घर लौट रहे प्रवासी श्रमिकों का डाटा बनाकर उसे प्रशासन व श्रम विभाग की वेबसाइट पर सुरक्षित करने की मांग की गई। ज्ञापन पर जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल के अध्यक्ष हेमंत नंदन ओझा राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष विश्राम सिंह राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के संयोजक रमाशंकर तिवारी उत्तर प्रदेश बैंक इंप्लाइज यूनियन के मंत्री एनपी मिश्रा यूपी मेडिकल एंड पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्री एसोसिएशन के मंत्री आर बी सिंह उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ के मंत्री राम सूरत पल्लेदार मजदूर यूनियन के मंत्री महेश सरोज असंगठित कामगार यूनियन के संयोजक राजमणि पांडे आदि के हस्ताक्षर हैं धरने में उक्त नेताओं के अतिरिक्त सतीश यादव संतराम सुरेश चंद आदि अन्य दर्जनों लोग उपस्थित थे धरना देने वालों के हाथ में मांगों के संबंध में मांगों की पट्टिकाए थी थी व हाथों में काला फीता बांधकर धरने पर बैठे थे उल्लेखनीय है कि कर्मचारी गण जनपद भर में अपनी ड्यूटी के दौरान काला फीता बांधकर या लगाकर अपना विरोध प्रकट करते हुए विरोध दिवस मना रहे हैं। धरने के अंत में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया गया जिसकी प्रतियां श्रम मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार उप श्रम-आयुक्त प्रयागराज मंडल एवं जिला अधिकारी प्रतापगढ़ को दी गई। उक्त जानकारी देते हुए जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल के अध्यक्ष हेमंत नंदन ओझा ने जनपद भर के अनेक ट्रेड यूनियन संगठनों, कर्मचारी मजदूर संगठनों से जुड़े हुए सदस्यों को देशव्यापी विरोध दिवस को सफल बनाने के लिए बधाई देते हुए कहा कि जल्दी ही एक बड़े आंदोलन के लिए हम सबको अपनी कमर कसकर तैयार रहना चाहिए क्योंकि सरकार हर हाल में आजादी के 70 सालों में व आजादी के पूर्व से बने हुए तमाम विभागों वह सार्वजनिक उद्योग उपक्रम को बेचने पर तुली हुई है और नई नौकरियों में भर्ती के बजाय पद समाप्त करने पर सरकार तुली है श्रमिकों के अधिकार पर लगातार चोट पहुंचा रही है ऐसे में यह सरकार अब पूरी तरह से अनैतिक हो गई है देश के मजदूरों व कर्मचारियों को आर-पार का संघर्ष करना पड़ेगा।
* प्रेस-विज्ञप्ति*
ग्वालियर, मध्यप्रदेश:
फूलबाग पर मजदूर संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन
★44 श्रम कानूनों को बहाल करने और 4 श्रम कोड वापस लेने की
मांग
★श्रमिकों को फिर से गुलाम बनाना चाहती है सरकारें -डॉ.सुनीलम
देश के मजदूर संगठनों द्वारा केंद्र और राज्य की श्रमिक एवं जन विरोधी नीतियों के खिलाफ आज पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किया गया । ग्वालियर में 10 बजे विभिन्न ट्रेड युनियन के लगभग सौ कार्यकर्ता फूलबाग पंहुचे जहाँ शारिरिक दूरी बनाए रखते हुये उन्होंने 44 श्रम कानूनों को बहाल करो, 4 श्रम कोड वापस लो, बारह घण्टे काम नहीं करेंगे,
, श्रमिक विरोधी सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए तथा पोस्टरों का प्रदर्शन किया । आंदोलनकरियों को पुलिस अधिकारियों ने आकर आंदोलन न करने की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रदर्शन जारी रखा गया तो एफआईआर दर्ज की जाएगी ।
उपस्थित श्रमिक नेताओं ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम है तथा देश के सभी जिलों के कारखानों एवं रेल्वे की ट्रेड बीमा बैंक एवं शासकीय कर्मचारियों के संगठनों द्वारा श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह कार्यक्रम किया जा रहा है। कोरोना की वजह से संवेधानिक अधिकार समाप्त नहीं हो जाते ।इसके बावजूद जब पुलिस अधिकारी अपनी बात पर अड़े रहे तब विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया ।
कार्यक्रम में हिंद मजदूर सभा,किसान संघर्ष समिति,जनांदोलनो के राष्ट्रीय समन्वय ,अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति
के प्रतिनिधि के तौर पर पूर्व विधायक डॉ.सुनीलम ,सीपीएम के प्रदेश सचिव जसविंदर सिंह, सीटू के रामविलास गोस्वामी,
सीटू की ज़िला अध्यक्ष कमलेश शर्मा महासचिव एम के जायसवाल ,इंटक के रतीराम यादव, अशोक गोस्वामी एटक के हरी संकर माहोर, पूरनसिह परिहार और सुनील गोपाल, भूपेश जैन एआईयूटीयूसी के शामिल हुए।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ.सुनीलम ने कहा कि कोरोना संकट एक पूंजीवादी संकट है तथा केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारें इस संकट का इस्तेमाल श्रम कानूनों में श्रमिक विरोधी
संशोधन लागू करने के लिए कर फिर से मज़दूरों को गुलाम बनाना चाहती है । ।उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 44 श्रम कानून समाप्त कर 4 कोड लागू कर दिये हैं । अब आठ घंटे की जगह बारह घंटे काम लेने तथा सभी श्रम कानूनों को अगले एक हजार दिन के लिए राज्य सरकारों द्वारा निलंबित करने की घोषणा की गई है।
डॉ.सुनीलम ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने कहा था कि मजदूरों को लॉकडाउन के दौरान पूरा पैसा दिया जाएगा तथा नौकरी से नहीं हटाया जाएगा, परंतु सरकार अपने निर्देश को लागू करने में पूर्णतया विफल रही है।
डॉ.सुनीलम ने कहा कि आठ करोड़ प्रवासी मजदूरों को दस हजार रुपये प्रति माह सम्मान निधि देने तथा सभी इच्छुक मजदूरों को मनरेगा के तहत 200 दिन का काम 500 रुपये की दर पर प्रदान करने की मांग की है ।
उन्होंने कहा कि देश के किसान संगठन एवम जन संगठन विरोध दिवस का राष्ट्रीय स्तर पर विरोध कर रहे हैं।
सीपीएम के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि कोरोना से निपटने में मोदी सरकार पूरी तरह विफल रही है। कोरोना संक्रमण से केंद्र सरकार ने जिस तरह निपटा है ,उसके चलते देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है । उन्होंने कहा कि कोरोना से निपटने में गुजरात मॉडल पूरी तरह विफल रहा है तथा केरल की वामपंथी सरकार का मॉडल सर्वश्रेष्ठ साबित हुआ है ।
सीटू के रामविलास गोस्वामी ने कहा कि ग्वालियर के श्रमिक आंदोलन का शानदार
संघर्ष और बलिदान का इतिहास है । उन्होंने कहा कि मजदूर संगठनो का मोर्चा पूरी ताकत के साथ सरकारों की श्रमिक विरोधी,जन विरोधी नीतियों का विरोध पुरी। ताक़त से कर
रहा है।
उन्होंने कहा कि हम मज़दूरों के अधिकारों पर हर हमले का पुरजोर विरोध करेंगे और
श्रम कानूनों की बहाली के लिए आंदोलन जारी रखेंगे।
उल्लेखनीय है ग्वालियर में आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर जॉइंट प्लेटफार्म ऑफ ट्रेड यूनियन्स एंड फेडेरेशनस की अपील पर एच एम एस ,सीटू ,एटक ,इंटक ,यू टी यू सी ,ए आई यू टी यू सी ,टी यू टी सी,सेवा ,एल पी एफ
,ए आई सी सी टी यू द्वारा किया गया था ,जिसका देश के किसान संगठनों और जन आंदोलनों द्वारा समर्थन किया गया।
-डॉ सुनीलम
9425109770, 9981409770 .
★★★










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