शादीकार्ड की फजीहत

                   विवाह का शुभकामना संदेश!

      आजकल ज़्यादातर शादियाँ घर पर नहीं होतीं। प्रायः लोग कहीं कोई मैरिज होम/हाल बुक करते हैं। शायद इसीलिए कॉर्ड का चलन हुआ। ताकि पता लग सके कि आमंत्रितों को कहाँ जाना है।

         अजीब बात है कि इसे इस बात से भी जोड़ दिया गया है कि किस रिश्ते को महत्व देना है, किसे नहीं। दामाद, बहनोई, मामा, फूफा, उनके नजदीकी रिश्तेदार, दोस्त-यार से होते हुए लिस्ट समाज के महत्त्वपूर्ण परिचित व्यक्तियों, काम में आने वाले या आ सकने वाले व्यक्तियों तक पहुँचती है। जातिगत रिश्तों में एम.पी.-एम.एल.ए., भूतपूर्व मंत्री-संत्री, मठाधीश, संस्थाओं के अध्यक्ष-मंत्री आदि विशेष आमंत्रित व्यक्ति होते हैं। 

            इधर कुछ सालों से वैचारिक रिश्तों को भी महत्व मिलने लगा है। अम्बेडकरवादियों और प्रगतिशीलों या मार्क्सवादियों के लिए यह बड़ा मुश्किल फैसला होता है। समाज ढकोसलों-आडम्बरों से भरा है, पर शादी-व्याह तो उसी समाज में करना है। जरूरी नहीं कि शादी वाला दूसरा पक्ष भी अम्बेडकरवादी या मार्क्सवादी हो। ऐसे में अगर तमाम रीति-रिवाज हिन्दू या मुस्लिम पण्डित-मौलवियों के हिसाब से होना हो तो ऐसे वैचारिकों को आमंत्रित करना अपनी खिल्ली उड़ाने जैसा होता है। इसलिए इनमें भी खास वे दोस्त चुने जाते हैं जो अपने जैसे ही समय की नज़ाकत समझने वाले हों। वरना ऐसे लोगों को भुला देने में ही समझदारी होती है। बाद में क्या बताएँ ये-वो जुटाने के चक्कर में ध्यान ही नहीं रहा या न जाने कैसे भूल गया आदि बहानों से काम चल जाता है।


             इधर कोरोना ने तो और भी सब गड्डमड्ड कर दिया है। ज़्यादा लोगों को न बुलाने में ही समझदारी होती है। या यूँ कहें कि इसने आमंत्रण भूलने सम्बन्धी बहाने को पुख़्ता करने में बड़ी मदद की है। 
           सो जिन लोगों को आमंत्रण या निमंत्रण न मिले, उन्हें समय की नज़ाकत देखनी चाहिए। हो सकता है लिस्ट इतनी ज़्यादा बड़ी बन गई हो कि कार्ड कम पड़ गए हों। या फिर कोरोना-प्रोटोकॉल आड़े आ रहा हो। ऐसे लोग अगर खुद को खास मित्र-परिचित समझते हैं तो इसी बात से खुश हो जाना चाहिए कि चलो, शादी तो हो रही है!...

          ऐसे लोगों को घर बैठे ही मंगलकामना और बधाई संदेश भेज देना और खुश रहना चाहिए। वैसे भी यह सब होता तो शुभकामना ही है। यानी सदिच्छा। बाकी शादी जिसकी होती है, असली लड्डू भी उसी के लिए होते हैं।   🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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