नियमकाल में बुलडोजर के नियम

बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की जयंती पर आपके लिए एक कविता:


                         नियमकाल

                                     -- मुकुल सरल


आप शोर मचाते हैं कि

यह आपातकाल है

नहीं

यह नियमकाल है


आपातकाल भी एक नियम है

और सबकुछ हो रहा है नियम अनुसार


नियम के तहत ही हथियाई गई है सत्ता

नियम के तहत ही चल रहा है बुलडोज़र


नोटबंदी, लॉकडाउन से लेकर

ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स के छापे भी

यहां तक कि विपक्ष का संसद निकाला

और जेल भेजा जाना भी

सबकुछ है नियम अनुसार


आप बेवजह घबरा रहे हैं


नियम के तहत ही निकाले जा रहे हैं जुलूस

नियम के तहत ही किए जा रहे हैं दंगे

नियम के तहत ही मारे जा रहे हैं निर्दोष लोग


कुछ भी नियम विरुद्ध नहीं


नियम के तहत ही बदला जा रहा है इतिहास

नियमों के तहत ही गढ़ा जाएगा आपका नया भविष्य


बिल्कुल चिंता मत कीजिए


संविधान में बदलाव भी नियमों के तहत किए जा रहे हैं

नियमों के तहत ही गढ़ा जा रहा है नया विधान

नियमों के तहत ही कुचला जा रहा है लोकतंत्र

नियमों के तहत ही आएगा फ़ासीवाद


अब कुछ भी नियम से बाहर नहीं होगा


यक़ीन मानिए

इस सत्ता में इस क़दर लागू हैं नियम

कि

नियम भी तोड़े जा रहे हैं नियमों के तहत

                        ★★★★★★★

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