कविता: विरोध-मार्च पर लाठीचार्ज
विरोध मार्च पर लाठीचार्ज
-हरमीस बोहेमियन
अब आसमान से आग बरसे
कि सामने खड़ा कर दो मौत की दीवार
हम आग से गर्माहट लेंगे
और मृत्यु से करेंगे दोस्ती
हम अपनी हड्डियों में बारूद भरकर निकले हुए लोग हैं
हम तुम्हारे खिलौनों से नहीं डरते
तुम हमारे जिस्मों पर
अपने कायर होने का निशान देते हो
समझते हो यह हमारे लिए नया है
और भूल जाते हो , यह निशान
विरासत में मुझे मेरे पुरखे से मिला है
अपने हक़ और आज़ादी के लिए लड़ना
या लड़ते हुए कुर्बान हो जाने का इतिहास
हमारे रक्त में बह रहा है सदियों से
हम जानते हैं राह चलते गर
अचानक से आ जाये भेड़ियों का दल
तो हमें क्या करना है
हम जानते हैं कि
जब खतरे में पड़ जाये जान
तो हमें क्या करना है
हम जानते हैं कि
जब कुर्सी पर बैठा हो पगलाया शैतान
तो हमें क्या करना है
हमें अपने साथियों का
कसकर पकड़ना है हाथ
चूमना है एक दूसरे का माथ
और मर्सिये को सोहर की तरह गाते हुए
तनी मुट्ठियाँ हवा में लहराते हुए
कूच करना है मंजिल की ओर ...
अब आसमान से आग बरसे
कि सामने खड़ा कर दो मौत की दीवार
हम आग से गर्माहट लेंगे
और मृत्यु से करेंगे दोस्ती
हम अपनी हड्डियों में बारूद भरकर निकले हुए लोग हैं
हम तुम्हारे खिलौनों से नहीं डरते । ★★★
[अनुमति-हरमीस बोहेमियन-कवि, चित्र- साभार फ़ेसबुक]

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