गज़ब!: शासक ब्राह्मणवादी ही होता है!...
शासक ब्राह्मणवादी ही होता है!...
यह बहस छुपाई जाएगी!...खास तौर पर तथाकथित 'दलित' 'माननीय' के कारण! तथाकथित अम्बेडकरवादी इसे पचा नहीं सकते। क्योंकि वे मानते और मनवाना चाहते हैं कि 'जन्मना जायते शूद्र:' महामंत्र पर उन्हीं का पैटेंट है!ब्राह्मणवादी-मनुवादी भी इसे छुपाना चाहेंगे क्योंकि इससे उनकी पार्टी की छवि खराब होती है, उनके ब्राह्मणवाद पर पलीता तथाकथित एक 'ब्राह्मण' ही लगा रहा है।
तथाकथित 'दलित और अम्बेडकरवादी' माननीय एक तथाकथित 'ब्राह्मण' से कह रहा है- आप कर्मकाण्डी बनिए!...
तथाकथित 'ब्राह्मण' स्वाभाविक तौर पर इसे अपनी बेइज़्ज़ती समझता है! जो समाज-चिंतक है, अर्थशास्त्री है, ब्राह्मणवाद-विरोधी है, वह कर्मकाण्डी-ब्राह्मणवादी कैसे हो सकता है?...अर्थशास्त्री डी. एम. दिवाकर यही सिद्ध कर रहे हैं।
असल मेें सत्ताधाारी ब्राह्मण ही होता है, उसकी जाति कुछ भी हो। जिसे सिंहासन चाहिए, उसे ब्राह्मणवादी होना पड़ेगा। या हर सिंहासनारूढ़ को ब्राह्मणवाद अपने गिरफ्त में कर लेगा। एमएलसी संजय पासवान ने यही सिद्ध किया!.... इसके पहले कथित दलित नेेताओं ने यह सिद्ध किया है!
पर इस बहस को छुपाना नहीं आगे बढ़ाना चाहिए! जनता को पता चलना चाहिए कि असल में ब्राह्मणवाद-मनुवाद के नाम पर जो लोग राजनीति की समर्थक-विरोधी की मलाई काट रहे हैं, वे कौन हैं और इस राजनीति के शिकार-भुक्तभोगी कौन हैं!... ★★★

Brahmn nhin thakur, yadav, dalit..bhi.Satta men hote hai.
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