एक कविता: ढोंगियों का दल - काज़ी नज़रुल इस्लाम


                               एक कविता : ढोंगियों का दल

                                                  काजी नज़रुल इस्लाम


मनुष्य से घृणा कर के
कौन लोग कुरान,वेद,बाइबिल चूम रहे हैं बेतहाशा
किताब और ग्रंथ छीन लो
जबरन उनसे
मनुष्य को मारकर ग्रंथ पूज रहा है
ढोंगियों का दल
सुनो मूर्खो,मनुष्य ही लाया है ग्रंथ
ग्रंथ नहीं लाया किसी मनुष्य को!
                                      ★★★

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