आत्मालाप-19: खबरदार!...


                                     🔴  खबरदार! 🔴

                                                           -अशोक प्रकाश

हर ख़ास-ओ-आम को
खबरदार किया जाता है
उससे पहले
आप सबको
होशियार किया जाता है
कि लूट गैर-कानूनी है
और क़ानून के अनुसार
की गई लूट
लूट नहीं
आपकी की धन-सम्पदा पर
कब्जा करने की सरकारी छूट
होती है
इसका बीज
लोकतंत्र के नाम पर
जनता खुद
बोती है...

यह भी जान लिया जाय
कि आपके बैंक खाते
दरअसल सरकार के
बैंक खाते होते हैं
इसलिए इनमें रखे
डेढ़ हज़ार हों या
डेढ़ हज़ार करोड़
आपके सर नहीं
सरकार के घर
ढोते हैं
और अब
ये सरकार पर है कि
वो कैसे कब और किसको
इसे देती है
बदले में
क्या और कितना लेती है...

इसलिए सरकार-बहादुर
की बात सुनें
मन में गुनें
ज़िंदगी जीने का
जैसा कहें
वैसा तरीक़ा चुनें...

यह भी समझें
कि दरअसल आपकी ज़िन्दगी
आपकी नहीं होती
सरकार की होती है
सरकार की निगाह में
यह सिर्फ
सीप में बंद मोती है
इसलिए
राष्ट्र यानी
सरकार के नाम पर
आपके पैसों को ही नहीं
आपको भी क़ुर्बान
किया जा सकता है
आप कहें तो इसे
क़ुर्बानी का नाम
दिया जा सकता है...

समझदार को
इशारा काफ़ी
पैसों और ज़िंदगी में से
एक की माफ़ी...
लीजिए
बैंक में आने के बदले
टॉफी
कहना मत इसे
सरकार की वादाखिलाफी....

खबरदार...खबरदार!
जोर से बोलो
जै सरकार...जै सरकार!
⚫⚫

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