आत्मालाप-20: शातिर से सावधान
🔴 *शातिर से सावधान!* 🔴
- अशोक प्रकाश
🔹वह अफवाहें फैलाता है
झूठ बोलता है
तिल का ताड़ बनाता है...
कभी रोता है
कभी गिड़गिड़ाता है
कितने मूर्ख हैं लोग-
सोच
मन्द-मन्द मुस्काता है...
सफल हो जाने पर
खिलखिलाता है
समझ न जाए कोई
इसलिए
रिरियाता है
सबको उल्लू बनाता है...
शातिर
भावनाएं भड़काता है
आप सब लड़ें
ऐसा माहौल बनाता है
निगाहें कहीं और होती हैं
मीठी-मीठी बातें सुनाता है
बिन बुलाए आता है
फंसाकर चला जाता है...
उसे ऐसी कला आती है
दुअन्नी अठन्नी बन जाती है
एक रुपये का सामान
खरीद लाता है
संभलने से पहले शातिर
चला जाता है...
वह
असली नेता है
न लेता है न देता है
अपनों को ही
चूना लगाकर
लुटिया डुबो देता है...
बेनक़ाब होने पर
चिढ़ता है चिड़चिड़ाता है
प्रणाम भी करो तो
मारने दौड़ा आता है
बचाओ-बचाओ
चिल्लाता है
मार नहीं पाने पर
कुढ़ता है
बिलबिलाता है...
शातिर
पक्का शिकारी है
बनता ऐसे है जैसे
बिलकुल भिखारी है
घर-घर जाता ऐसे जैसे
ब्रजनन्दन बिहारी है
क्या करे शातिर
छोड़ो
आदत है लाचारी है...
🔹🔴
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