किसानों पर आफ़त


                                   किसानों पर आफ़त



देश की रीढ़ कही जाने वाली हमारी खेती-बाड़ी पर बढ़ता ख़तरा हमारी ज़िंदगी पर, हमारे भविष्य पर मंडराने वाला शायद सबसे बड़ा खतरा है!...

पिछले लगभग बीस सालों में उत्तर भारत के हरे-भरे खेतिहर मैदानों में नीलगाय, जंगली सूअर आदि बेतहासा बढ़े हैं। ये जंगली जानवर खेतों को बर्बाद करने के साथ-साथ जब तब इंसानों पर भी हमला करते हैं। आशंका व्यक्त की जा रही है कि सरकारों द्वारा बहुराष्ट्रीय कंपनियों को 'कॉरपोरेट खेती' करने की छूट देने के साथ-साथ किसानों की ज़िंदगी में इस तरह की आफत आई है। 

जब अवध के इलाकों में जगह-जगह जंगल-झाड़ियां थीं तब भी इन जानवरों को कहीं नहीं देखा गया था। इनकी जगह पर अनेक दूसरे जानवर जैसे स्याही, सियार-गीदड़, लकड़बग्घे आदि जानवर थे जिनसे कम से कम खेती को कोई खतरा नहीं था।....वे आज कम हो रहे हैं। किंतु ये बड़े जानवर जिनके ठहरने के जंगली इलाके इन क्षेत्रों में प्रायः नगण्य हैं, बढ़ते जा रहे हैं और आये दिन खेती के साथ-साथ इंसानों पर भी ये हमलावर होते इन जानवरों पर कोई अंकुश नहीं। 

दरसअल, इसी तरह 'गोवंश' के हो-हल्ले के पीछे भी उनकी रक्षा नहीं बल्कि उनके साथ खेती का नाश भी छुपा हुआ है!...खेती और किसान को बरबाद कर गाय-बैल की रक्षा भला कैसे हो पाएगी?

बहुराष्ट्रीय कंपनियां पूरी खेती पर कब्ज़ा करने की नीयत रखती हैं ताकि देश की आम जनता उनसे ही अनाज, आटा-चावल-सब्ज़ियां आदि खरीदने के लिए मजबूर हो। यह तब तक नहीं हो पाएगा जब तक खेती-किसानी खुद आम जनता करती रहेगी। इसीलिए नीलगायों और अन्य जंगली जानवरों में एकाएक आई इस बृद्धि में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की चाल की आशंका व्यक्त की जा रही है। 

           https://youtu.be/KtitEnik3kw

वैसे भी बढ़ती लागतों से किसान परेशान है। ऊपर से हरी-भरी खेती जानवरों द्वारा नष्ट किए जाने से उनकी ज़िन्दगी और दूभर हो रही है। सरकारों द्वारा भी इस मुद्दे को गम्भीरता से न लेने के कारण किसान और हलाकान हो रहा है।.... ★★★

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