एक और कर्ण
एक और कर्ण: किसी की तलाश है उसको
बहुजन नेता कहाँ रहते हैं?
हमारे देश में हर एक को किसी न किसी की तलाश है!...
ऐसी ही तलाश शायद पूरी दुनिया को भी हो!...
वंचित समाज एक पूरा वंचित देश है, दुनिया है.
इन्हीं वंचितों में से है- एक और कर्ण!...
उसे महाभारत के कर्ण की तरह न तो किसी राजा की तरह युद्ध में शामिल किया गया है, न ही उसकी कोई पहचान है. फिर भी वह हर कहीं दिख जाता है: जीवन बचाने का, अस्तित्त्व बचाने का संघर्ष करता हुआ!...
एक युद्ध लड़ता हुआ!...
महाभारत के कर्ण की तरह उसे दानवीर होने का कोई मुगालता नहीं!किन्तु वह किसी से भीख भी नहीं मांगता!...
वह जीवन जी सकने के एक ऐसे महाभारत में शामिल है जिसमें उसके सहयोगी केवल उसके मां-बाप हैं.
इस महाभारत के कर्ण की जमीन छीन ली गई।...शायद इसीलिए कि वह दलित समाज के कमजोर तबके का है!...उसकी कोई बहनजी या भाईजी, तथाकथित बहुजन-सर्वजन समाज का रानी या राजा नहीं हैं!...
उसका जीवन-संघर्ष इन राजाओं-रानियों ने कहीं और दुष्कर बना रखा है!...
उसके प्रति किसी में दयाभाव या सहानुभूति नहीं है!...
उसे, उसके परिवार को वोटबैंक समझा जाता है!....
उसका जीवन-संघर्ष अत्यंत कठोर है!...
शायद महाभारत के कर्ण से भी ज़्यादा मुश्किल है
करन का जीवन! ★★★

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