प्रेरणा- ऐप बनाम 'शिक्षक की जासूसी'


'शिक्षक की जासूसी' का 
 डिज़िटल संस्करण 'प्रेरणा-ऐप':

वे हमें चोर समझते हैं!...

वे, जिनकी
चोरी की समानान्तर व्यवस्था
पूरे समाज में बदबू की तरह
फैली है...

वे, जो
अंग्रेजों के दलालों के रूप में
हमारे देश और उसकी 
भोली-भाली जनता को 
गुलाम बनाए रखे
खून चूसा...

वे, जो खुद
बंगलों में रहते रहे और
झोपड़ियों को खाक में मिलाते रहे...

वे, जो रोबदाब मतलब 
शोषण और अत्याचार के पर्याय हैं
वे,'आखर का उजियारा फैलाने वाले'
देश के भविष्य की एक मात्र उम्मीद
शिक्षक को
चोर समझते हैं!...

पूंजी के संचार माध्यमों से
शिक्षकों को  बदनाम करने  वालों
असली चोरों के असली सरदारों,
समाज की चेतना के एकमात्र वाहक
शिक्षक भी
तुम्हें  
अच्छी तरह समझते हैं!...
                          -अशोक प्रकाश


'प्रेरणा-ऐप' की प्रेरणादायी परिस्थितियाँ 

             महान जासूस 008 जेम्स बांड के डिजिटल-अवतार
                                       प्रेरणा ऐप 
                    के इंजीनियरों से शिक्षकों के कुछ सवाल
                                         
                     
◆ दूर दराज गांव में प्रत्येक मौसम और परिस्थिति में सुबह समय से पहुंचकर पढ़ाने व अन्य सभी आवश्यक कार्य करने वाले हम चोर हैं ?

-बिना किसी मद के राष्ट्रीय पर्वों पर विद्यार्थियों को मिठाईयां खिलाने और पुरस्कार बांटने वाले हम चोर हैं?

-बिना किसी मद के प्रति वर्ष खेल समारोह कराने वाले हम चोर हैं?..

◆ महीनों जेब से सभी उपस्थित बच्चों उनकी माताओं, रसोइयों आदि  को खाना, फल, दूध आदि खिला - पिलाकर 52% कनवर्जन कॉस्ट में संतोष करने वाले हम चोर हैं ?

◆ बीआरसी / एनपीआरसी आदि जगहों से कागज, किताबें, जूते - मौजे, बैग, आदि सामान अपने वाहन / किराए से लाने व ले जाने वाले हम आपको चोर नजर आते हैं?

◆ पूरे वर्ष बिना नहाए /मुंह धोए, कॉपी, पेन,पेंसिल न लाने वाले बच्चों को साक्षर करने वाले चोर हैं ?

◆ शासन द्वारा भेजी गई विभिन्न  दवाओं को खुद खाकर बांटने वाले हम चोर हैं ?

◆200 ₹ में एक जोड़ी ड्रेस, 200 में ही स्वेटर बांट देने वाले हम चोर ही तो हैं?

◆ लोकतंत्र में निष्पक्ष रूप से चुनाव करवाकर, नेता लोगों को जितवाकर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनवाने वाले हम चोर हैं साहब?

◆ 5000₹ में रंगाई पुताई, 5000₹ में पूरे वर्ष स्कूल का खर्चा चलाने वाले चोर नहीं डकैत हैं, हम ?

◆ पूरे वर्ष केवल 14 आकस्मिक अवकाशों से घर से 600 किमी तक की दूरी होने में भी उफ़ किए बगैर परिवार का पालन पोषण करने वाले चोर हैं हम ?

◆ देर से पहुंचने का शौक अगर रखते तो नित दुर्घटनाओं का शिकार होकर मरने वाले चोर हैं हम ?

◆ प्रति वर्ष गांव में घूमकर नामांकन बढ़ाने वाला, रोज घर - घर जाकर आवाज लगाने वाले चोर हैं हम ?

◆ बच्चों के हित की खातिर प्रधानों , दलालों, नेताओं से भिड़ जाने वाले चोर ही हैं हम ?

◆ सफाई कर्मी के न आने के बावजूद रोजाना स्कूल साफ सुथरा रखने वाले चोर हैं हम ?

◆ विद्यालय समय के बाद भी बैंक, बीआरसी, बाजार, राशन की दुकान आदि पर जाकर स्कूल सम्बन्धी आवश्यकतायें पूरी करने वाले चोर हैं हम ?

◆ शासन द्वारा समय पर रसोइयों को मानदेय न देने के बावजूद खुद पैसे देकर उनका खर्च चलवाने वाले चोर हैं हम?

◆ बीमार/चोटिल होकर भी मेडिकल के लिए रिश्वत  देने वाला चोर हैं हम ?

◆ मातृत्व के दर्द में भी अवकाश के लिए पैसे देने और बच्चे की बीमारी में भी ईमानदारों के पेट भरने वाले एक चोर ही तो हैं हम ?

-अपना ही पैसा प्रथम वेतन/एरियर पाने के लिए रिश्वत देने वाले लुटेरे हैं हम?

◆◆जनाब, आप हमारे पीछे प्रेरणा ऐप क्या सीबीआई लगवा दीजिए, लेकिन हमको हमारे-
● विद्यार्थियों_का_हक :
★प्रत्येक_कक्षा_के_लिए_कक्षा_कक्ष_एवं_शिक्षक।
  और
हमारा_हक :
★गैर_शैक्षणिक_कार्यों_से_मुक्ति,
★निःशुल्क_चिकित्सा,
★पुरानी_पेंशन,
★अर्जित_अवकाश 
★गृह_ब्लाक_में_नियुक्ति...
    दे दीजिए!

   हे जासूसी के युगावतार 
              प्रेरणा_ऐप महराज!
                      एक बार अपने इंजीनियरों के 
                              कारनामों की भी जासूसी कर लीजिए!..

 साभार :
व्हाट्सएप मीडिया समूह- शिक्षक 'राष्ट्र निर्माता'●●

Comments

  1. शिक्षक की नौकरी पर लगातर संकट बढ़ रहे हैं...

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