आत्मालाप-2 : मज़मा लगाओ...
🔴 मज़मा लगाओ... 🔴
-अशोक प्रकाश
मज़मा लगाओ
जोर-जोर से चिल्लाओ
आओ आओ आओ...
सौ ग्राम सोना देकर-
दो सौ ले जाओ...
आओ आओ आओ!
मज़मा लगा
हर आदमी गया ठगा
मज़मेबाज़
सोना लेकर भगा!
दो साल बाद
मज़मेबाज़ फिर आया
और जोर से चिल्लाया-
पीतल की एक थाली लाओ
चांदी की दो ले जाओ!
आओ आओ आओ...
पीतल का क्या काम
चांदी का है बहुत दाम
महिमा ऊपर वाले की
न मेरी न मेरे साले की
मुनाफ़ा ही मुनाफ़ा कमाओ
आओ आओ आओ!
लोग फिर आए
एक नहीं कई बर्तन लाए
चांदी की चमक का नशा
हर आदमी फंसा
मज़मेबाज़ जस्ता दे गया
कीमती सारे बर्तन ले गया!
इस बार-
मज़मेबाज़ साथ एक बाबा लाया
मज़मेबाज़ नहीं अब बाबा चिल्लाया
साधुओं के वेश में
अपने ही देश में
झूठ क्यों मैं बोलूँगा
सचमुच मैं डोलूँगा
सांस बाहर आएगी
शक्ति अंदर जाएगी
समस्याओं का होगा निदान
भारत फिर बनेगा महान
एक बार और जोर से सांस निकालिए
फिर जोर-जोर शक्ति अंदर संभालिए
लीजिए सीसी में दुःख-भंजक बूटी
यह भी लीजिए मनोरंजक घूंटी!
दाम?...दाम??..दाम???
राम!..राम!!..राम!!!
दक्षिणा कह बेटा
रहेगा नहीं लेटा...
यहां आने का केवल एक हज़ार
यहां से जाने का भी एक हजार
बूटी-घूंटी के केवल दो हजार
परमार्थ सेवा सहित कुल हुए-
पांच हजार...
पूरा जीवन सुख-शान्ति-स्वास्थ्य का वादा
इंसान क्या नहीं कर सकता हो
पक्का इरादा
पांच हजार कोई ज्यादा नहीं है
मर्द है तू कोई मादा नहीं है
गाँव-गाँव तू भी जा
आधा दे आधा खा
जल्दी निकाल पांच हजार
आना फिर जरूर एक बार....
गाँव में पूरे गज़ब का चढ़ा जोश
होशियार से होशियार हुए मदहोश...
क्या-क्या हुआ उसके बाद
कुछ नहीं रहा किसी को याद!
अब जब-जब मज़बेबाज़ आता है
धोखेबाज नहीं, बाबा माना जाता है
लूट-बटोर हरामखोर जो चाहे
ले जाता है...
फिर भी चोट्टा
ईमानदार कहलाता है!
⚫⚫ ⚫⚫
-अशोक प्रकाश
मज़मा लगाओ
जोर-जोर से चिल्लाओ
आओ आओ आओ...
सौ ग्राम सोना देकर-
दो सौ ले जाओ...
आओ आओ आओ!
मज़मा लगा
हर आदमी गया ठगा
मज़मेबाज़
सोना लेकर भगा!
दो साल बाद
मज़मेबाज़ फिर आया
और जोर से चिल्लाया-
पीतल की एक थाली लाओ
चांदी की दो ले जाओ!
आओ आओ आओ...
पीतल का क्या काम
चांदी का है बहुत दाम
महिमा ऊपर वाले की
न मेरी न मेरे साले की
मुनाफ़ा ही मुनाफ़ा कमाओ
आओ आओ आओ!
लोग फिर आए
एक नहीं कई बर्तन लाए
चांदी की चमक का नशा
हर आदमी फंसा
मज़मेबाज़ जस्ता दे गया
कीमती सारे बर्तन ले गया!
इस बार-
मज़मेबाज़ साथ एक बाबा लाया
मज़मेबाज़ नहीं अब बाबा चिल्लाया
साधुओं के वेश में
अपने ही देश में
झूठ क्यों मैं बोलूँगा
सचमुच मैं डोलूँगा
सांस बाहर आएगी
शक्ति अंदर जाएगी
समस्याओं का होगा निदान
भारत फिर बनेगा महान
एक बार और जोर से सांस निकालिए
फिर जोर-जोर शक्ति अंदर संभालिए
लीजिए सीसी में दुःख-भंजक बूटी
यह भी लीजिए मनोरंजक घूंटी!
दाम?...दाम??..दाम???
राम!..राम!!..राम!!!
दक्षिणा कह बेटा
रहेगा नहीं लेटा...
यहां आने का केवल एक हज़ार
यहां से जाने का भी एक हजार
बूटी-घूंटी के केवल दो हजार
परमार्थ सेवा सहित कुल हुए-
पांच हजार...
पूरा जीवन सुख-शान्ति-स्वास्थ्य का वादा
इंसान क्या नहीं कर सकता हो
पक्का इरादा
पांच हजार कोई ज्यादा नहीं है
मर्द है तू कोई मादा नहीं है
गाँव-गाँव तू भी जा
आधा दे आधा खा
जल्दी निकाल पांच हजार
आना फिर जरूर एक बार....
गाँव में पूरे गज़ब का चढ़ा जोश
होशियार से होशियार हुए मदहोश...
क्या-क्या हुआ उसके बाद
कुछ नहीं रहा किसी को याद!
अब जब-जब मज़बेबाज़ आता है
धोखेबाज नहीं, बाबा माना जाता है
लूट-बटोर हरामखोर जो चाहे
ले जाता है...
फिर भी चोट्टा
ईमानदार कहलाता है!
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