'रेणु' की होली!....
'रेणु' की होली
🔴 मशहूर कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु के बारे में " ८ मार्च से ११ अप्रील ( जन्म - ८ मार्च १९२१ औराही हिंगना तथा मृत्यु ११ अप्रील १९७७ पटना अस्पताल में ) तक चर्चा चलती है । रेणु के उपन्यास , कविता में होली का जिक्र कई तरह से आया है । ' नई दिशा ' २ मार्च १९५० के ' होली अंक में उनकी दो कविताएँ " मँगरू मियाँ के नए जोगीडे , और ' धमार फगुआ " प्रकाशित हुई थी -------
" मँगरू मियाँ के नए जोगीडे "
" ताक धिन्ना धिन , धिन्नक तिन्ना , ताक धिनाधिन
धिन्नक तिन्नक ।
जोगीजी सर - र - र , जोगीजी सर - र - र -- --
एक रात में महल बनाया , दूसरे दिन फुलवारी
तीसरी रात में मोटर मारा , जिनगी सुफल हमारी
जोगीजी एक बात में , जोगीजी एक बात में ,
जोगीजी भेद बताना. , जोगीजी कैसे -- कैसे ?
बाप. हमारा पुलिस सिपाही , बेटा है पटवारी
हाल साल में बना सुराजी , तीनों पुश्त सुधारी
जोगीजी सर - र - र ----
रूपया जोडा , पैसा जोडा , जोडी मैंने रेजगारी
जिसने मेरा भंडा फोडा , उसकी. रोजी मारी
जोगीजी सर - र - र -- -+
खादी पहनो , चाँदी. काटो , रहे हाथ में झोली
दिन दहाडे करो डकैती , बोल सुदेशी बोली
जोगीजी सर - र - र ------
-प्रस्तुति: राजानंद झा🔴💞

Nice sir
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