क्या मिलिये ऐसे लोगों से....- साहिर लुधियानवी


                      क्या मिलिये ऐसे लोगों से....

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क्या मिलिये ऐसे लोगों से, जिनकी फ़ितरत छुपी रहे
नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छुपी रहे, 
खुद से भी जो खुद को छुपायें क्या उनसे पहचान करें
क्या उनके दामन से लिपटें, क्या उनका अरमान करें 
जिनकी आधी नीयत उभरे, आधी नीयत छुपी रहे 
नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छुपी रहे 
दिलदारी का ढोंग रचाकर जाल बिछायें बातों का
जीते जी का रिश्ता कहकर सुख ढूँढें कुछ रातों का
रूह की हसरत लब पर आये, जिस्म की हसरत छुपी रहे
नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छुपी रहे
जिनके जुल्म से दुखी है जनता, हर बस्ती और गाँव में
दया-धरम की बात करें वो बैठ के सजी सभाओं में
दान का चर्चा घर घर पहुँचे, लूट की दौलत छुपी रहे
नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छुपी रहे
देखें इन नकली चेहरों की कब तक जयजयकार चले
उजले कपड़ों की तह में कब तक काला संसार चले
कब तक लोगों की नजरों से छुपी हक़ीकत छुपी रहे
नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छुपी रहे।
                 
👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏~ साहिर लुधियानवी●●

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