एक निराला बाँसुरीवाला..

                                      एक निराला 
                                  बाँ सु री वा ला !...




हमारा देश बड़ा विचित्र है। यहाँ एक तरफ एक से बढ़कर एक कलाकार गली-गली धूल फांकते मिल जायेंगे तो दूसरी तरफ केवल परिवार और खानदान के नाम पर कुछ लोग असाधारण कलाकार बन जाएंगे!...

जिसके पास पैसा है, प्रचार-प्रसार, विज्ञापन का साधन है वह साधारण होकर भी असाधारण और जो अभावग्रस्त है, जिसके पास पास प्रचार-प्रसार के लिए संसाधन नहीं है, वह असाधारण होकर भी साधारण! किन्तु ऐसा भी नहीं कि यह कोई अकाट्य नियम है या ऐसा ही होता है।...इन्हीं में से कुछ साधारण लोग, आम लोग असाधारण और खास होते भी देखे गए है।

आप छोटे-बड़े पर्दों पर बड़े-बड़े कलाकारों को देखते होंगे जो मशहूर होने के साथ-साथ बड़ी धन-संपदा के मालिक हैं। इन्हीं में से कुछ साधारण लोगों को भी धीरे-धीरे आप मशहूर और 'बड़ा-आदमी' बनते देखे होंगे।...

अब इन आकर्षक और अलग वेशभूषा वाले सज्जन को ही देखिए!...ये बिहार से दिल्ली की ओर जाने वाली एक ट्रेन के साधारण डिब्बे यानी जनरल-बोगी में मिल गए। बाकी सब किसी तरह टाइम पास करते हुए रेलयात्रा पूरी कर रहें हैं और ये महाशय चैन की बाँसुरी बजाते हुए अपनी ही नहीं दूसरों की भी थर्ड-क्लास की इस यात्रा को आसान और बेफ़िक्र बना रहे हैं!

है न यह एक निराला बाँसुरीवाला!..???

हमारे लिए तो साधारण और आमलोग ही असाधारण और ख़ास होते हैं!... ★★★

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