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चुनाव-चर्चा:1: जनता मुखौटे उतरना चाहती है...

 चुनना क्या है?...                        ●  जनता अब उनके मुखौटे उतारना चाहती है! :                                              - साकेत सिसोदिया               2019 के आम चुनाव में विभिन्न स्तरों पर होने वाला मुक़ाबला 'मुखौटा बचाव' बनाम 'मुखौटा उतार' वर्गों में होगा।  इस चुनाव में सरकार, विपक्ष, राजनीतिक दल, नेता, मीडिया, पत्रकार, विश्लेषक, सोशल मीडिया योद्धाओं द्वारा अपनी लोकछवि के मुखौटे की यथास्थिति बचाये रखने का पुरजोर प्रयास होगा क्योंकि अंदरखाने यह सब जानते हैं कि इस बार किसी विशेष राजनीतिक दल की हवा के अभाव में एवं जटिल सामाजिक-आर्थिक समीकरणों के चलते मतदाता के अंतर्मन में झांक कर एक सुनश्चित राजनीतिक धारा प्रवाह का आंकलन करना उन सभी के बूते से बाहर है।                  उधर जनता भी इन 70 सालों में राजनीति...

आत्मालाप-20: शातिर से सावधान

🔴    * शातिर से सावधान! *   🔴                                    - अशोक प्रकाश 🔹वह अफवाहें फैलाता है झूठ बोलता है तिल का ताड़ बनाता है... कभी रोता है कभी गिड़गिड़ाता है कितने मूर्ख हैं लोग- सोच मन्द-मन्द मुस्काता है...  सफल हो जाने पर  खिलखिलाता है समझ न जाए कोई इसलिए रिरियाता है सबको उल्लू बनाता है... शातिर भावनाएं भड़काता है आप सब लड़ें ऐसा माहौल बनाता है निगाहें कहीं और होती हैं मीठी-मीठी बातें सुनाता है बिन बुलाए आता है फंसाकर चला जाता है... उसे ऐसी कला आती है दुअन्नी अठन्नी बन जाती है एक रुपये का सामान खरीद लाता है संभलने से पहले शातिर चला जाता है... वह असली नेता है न लेता है न देता है अपनों को ही चूना लगाकर लुटिया डुबो देता है... बेनक़ाब होने पर चिढ़ता है चिड़चिड़ाता है प्रणाम भी करो तो मारने दौड़ा आता है बचाओ-बचाओ चिल्लाता है मार नहीं पाने पर कुढ़ता है बिलबिलाता है... शातिर पक्का शिकारी है बनता ऐसे है जैसे बिलकु...

आत्मालाप-19: खबरदार!...

                                     🔴   खबरदार! 🔴                                                            - अशोक प्रकाश हर ख़ास-ओ-आम को खबरदार किया जाता है उससे पहले आप सबको होशियार किया जाता है कि लूट गैर-कानूनी है और क़ानून के अनुसार की गई लूट लूट नहीं आपकी की धन-सम्पदा पर कब्जा करने की सरकारी छूट होती है इसका बीज लोकतंत्र के नाम पर जनता खुद बोती है... यह भी जान लिया जाय कि आपके बैंक खाते दरअसल सरकार के बैंक खाते होते हैं इसलिए इनमें रखे डेढ़ हज़ार हों या डेढ़ हज़ार करोड़ आपके सर नहीं सरकार के घर ढोते हैं और अब ये सरकार पर है कि वो कैसे कब और किसको इसे देती है बदले में क्या और कितना लेती है... इसलिए सरकार-बहादुर की बात सुनें मन में गुनें ज़िंदगी जीने का जैसा कहें वैसा तरीक़ा चुनें... यह भी...

आत्मालाप-18: ये किसकी जीत ये किसकी हार...

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                                  तंत्रलोक के किस्से यार                                                     - अशोक प्रकाश तंत्रलोक के किस्से यार ये किसकी जीत ये किसकी हार। इक हौली में चार पियक्कड़ अक्कड़ बक्कड़ लाल बुझक्कड़ तय है वादा तय है रोना तय है खोना तय है सोना तय है किस पर पड़नी मार... ये किसकी जीत ये किसकी हार! रामसिंह के रमरजवा नौकर किसके पेट पे किसकी ठोकर चार हजार में कर मज़दूरी रामसिंह कहें ये मजबूरी किसके सइकिल किसके कार... ये किसकी जीत ये किसकी हार! खेती-बाड़ी मुश्किल काम दिन आराम न रात आराम खाद-बीज-पानी के चक्कर राधाकृष्ण बन गये घनचक्कर उमर हो गई सत्तर पार... ये किसकी जीत ये किसकी हार! बड़का लड़का पड़ा बीमार नौकरी-चाकरी कुछ न यार छोटकी की पहले परवाह कैसे होगा इसका ब्याह क्षीण पड़ रही जीवन-धार... ये किसकी जीत ये किसकी हार! ★★★★

करतार सिंह सराभा शहादत-दिवस

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शहादत दिवस:                     अंग्रेजी राज के लिए सबसे बड़ा खतरा':                          क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा                                                   प्रस्तुति : सुनील सिंह “हे भगवान मेरी यह प्रार्थना है कि मैं भारत में उस समय तक जन्म लेता रहूँ, जब तक कि मेरा देश स्वतंत्र न हो जाये!”... फाँसी पर चढ़ने से पहले ये शब्द थे 19 साल के उस भारतीय क्रांतिकारी नौजवान के -जिसे ब्रिटिश मानते थे ‘अंग्रेजी राज के लिए सबसे बड़ा खतरा’. मुकदमे के दौरान ब्रिटिश जज के आरोपों के जवाब में करतार सिंह ने पंजाबी में कहा था, “सेवा देश दी जिंदड़िये बड़ी औखी गल्लां करनियां ढेर सुखल्लियाँ ने जिन्हें देश सेवा विच पाइर पाया ओहना लाख मुसीबतां झल्लियां ने”. सिर्फ 19 साल की उम्र में देश के लिए फांसी के फंदे पर झूल जाने वाले इस सपूत को ...

किसानों का 'दिल्ली चलो!':

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प्रेस-विज्ञप्ति:                           29-30 नवम्बर दिल्ली चलो! मोदी सरकार द्वारा किसानों के साथ की गयी धोखाधड़ी के खिलाफ देश भर से किसानों का “दिल्ली मार्च”: साथियों! 2014 के लोकसभा चुनाव में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा ने देश के किसानों से कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुरूप फसलों का डेढ़ गुना दाम देने का वायदा किया था. यही नहीं उन्होंने देश के लोगों को अच्छे दिन लाने का वायदा भी किया था. पर अपने साढे चार साल के शासन में इस सरकार ने न सिर्फ देश के किसानों के साथ खुला धोखा किया बल्कि अपनी कारपोरेट परस्ती के कारण आज देश को आर्थिक कंगाली के कागार पर खड़ा कर दिया है. जो मोदी सरकार घाटे की खेती के कारण आत्महत्या को मजबूर देश के किसानों की कर्ज माफी को तैयार नहीं है, वही सरकार देश के सभी संशाधनों पर कब्जा जमा कर अति मुनाफ़ा लूट रहे देश के बड़े पूंजीपतियों का साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए का बैंक कर्ज इसी साल बट्टे खाते में डाल चुकी है. इस सरकार ने अपने एक चहेते पूंजीपति के लिए जहां...

नज़ीर अकबराबादी की दीवाली

                                दीवाली...                                       - नज़ीर अकबराबादी हमें अदाएँ दिवाली की ज़ोर भाती हैं । कि लाखों झमकें हरएक घर में जगमगाती हैं ।। चिराग जलते हैं और लौएँ झिलमिलाती हैं । मकां-मकां में बहारें ही झमझमाती हैं ।। खिलौने नाचें हैं तस्वीरें गत बजाती हैं । बताशे हँसते हैं और खीलें खिलखिलाती हैं ।।1।। गुलाबी बर्फ़ियों के मु‘ँह चमकते-फिरते हैं । जलेबियों के भी पहिए ढुलकते-फिरते हैं ।। हर एक दाँत से पेड़े अटकते-फिरते हैं । इमरती उछले हैं लड्डू ढुलकते-फिरते हैं ।। खिलौने नाचें हैं तस्वीरें गत बजाती हैं। बताशे हँसते हैं और खीलें खिलखिलाती हैं ।।2।। मिठाइयों के भरे थाल सब इकट्ठे हैं । तो उन पै क्या ही ख़रीदारों के झपट्टे हैं ।। नबात[1], सेव, शकरकन्द, मिश्री गट्टे हैं । तिलंगी नंगी है गट्टों के चट्टे-बट्टे हैं ।। खिलौने नाचें हैं तस्वीरें गत बजाती हैं। बता...