आत्मालाप-3 : उठो किसानों
🔴आह्वान-गीत🔴
उठो किसानों आगे आओ!
-अशोक प्रकाश
उठो किसानों आगे आओ, आगे आकर देश बचाओ।
हदें हैं सारी पार हो रहीं, कृषक-क्रान्ति का बिगुल बजाओ।।
खेत तुम्हारे देश तुम्हारा फिर तू है क्योंकर बेचारा।
पूंजीपति क्यों मौज़ मारते तू क्यों फिरता मारा-मारा।।
खाद-बीज-पानी-बिजली को तरस रहे क्यों ज़रा बताओ!
उठो किसानों आगे आओ...
खेतों के लिए कर्ज़ ले रहे क़र्ज़ कहें या मर्ज़ ले रहे।
खेतों का दुश्मन मरना था आखिर तुम क्यों स्वयं मर रहे।।
देखो दुष्ट हँस रहा तुम पर उठो कब्र से मज़ा चखाओ!
उठो किसानों आगे आओ...
कर्ज़माफ़ी का वादा करके सौ-पचास फिर दे देता है।
उधर करोड़ों-अरबों-खरबों पूंजीपति तो ले लेता है।।
हत्यारों को अब पहचानों जानों उनको सजा सुनाओ!
उठो किसानों आगे आओ...
तेरी मेहनत की कीमत क्यों रह जाती है एक तिहाई।
उनका कैसे बढ़ जाता है सोच मुनाफ़ा हर तिमाही।।
तुझसे ये धोखेबाज़ी है धोखेबाज़ों को धूल चटाओ!
उठो किसानों आगे आओ...
हाइ-वे फैक्ट्री मॉल के लिए तेरी जमीन तो छीन ले रहा।
लालच के फंदे में कसकर सारी खुशियाँ बीन ले रहा।।
देखो देशी-विदेशी लुटेरे ठग हैं इनको मार भगाओ!
उठो किसानों आगे आओ...
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