आत्मालाप-15: कबिरा तेरे नगर में...
कबिरा तेरे नगर में...
-अशोक प्रकाश
कबिरा तेरे नगर में घुस आया शैतान।
चेतन चौकी फूंककर बन बैठा भगवान।।
जुटते रोज़ वहां दिखें पंडे अरु जजमान।
जीमें भोज हराम का सोयें चादर तान।।
कबिरा तेरे नाम पे कितने मठ अरु पीठ।
मंत्र मारता है फिरे पांड़े कितना ढीठ।।
वह बज़ार जिसमें खड़ा लिए लुकाठा हाथ।
कबिरा तू ही बिक गया मारा फिरे अनाथ।।
कबिरा तेरा समय तो फिर भी अच्छा यार।
गर होता जो आज तू, देते वे तो मार।।
★★★★
Comments
Post a Comment