आत्मालाप-16: इस रात की कोई दीवाली नहीं!..


                               कोई दिवाली नहीं!...


इस रात की 
कोई दिवाली नहीं!...
फूल बिके नहीं, 
कर्ज़ कैसे लौटेगा, 
पता नहीं!...

सोच में डूबे
वहीं पर खो गये
रात सिरहाने टिकाए
सो गये!...    ★★★

Comments

Popular posts from this blog

अम्बेडकरवाद से बड़े अम्बेडकरवादी?..

हम देश, हमारा देश- 1: ऐ बनारसी विकास

नियमकाल में बुलडोजर के नियम