घंटी-बाबा


                             घंटी-बाबा

         https://youtu.be/-HRucq7l3is

भक्तों पर संकट बढ़ रहा है. 
रोज़ी-रोज़गार संकट में है!

उनके पास समय की कमी है.
 फुर्सत के वक़्त ही वे सही समय मन्दिर पहुँच पाते हैं. 
बड़े-बड़े पढ़े-लिखे भक्त मोबाइल, लैपटॉप, कम्पुटर पर लगे हैं तो साधारण #गरीब #भक्त मेहनत-मजदूरी के बाद मोबाइल पर कुछ समय बिताते हैं.
ऐसे में सुबह-शाम #आरती-वन्दना तो बस मौके की बात रह गयी है.
पर मन्दिर का काम-काज,#पूजा-अर्चना तो होनी ही है!....
तो मन्दिर में भक्तों की जगह आ गये हैं घंटी-बाबा या मशीन वाले घंटी-बाबा!

#पुजारी जी का काम भी आसान हुआ.  कोई तो है साथ देने के लिए!...#जीवन का यही #अंतर्विरोध उसे गति देता है, देता रहेगा!...जो काम हम कर नहीं सकते वह धीरे-धीरे निरर्थक लगने लगेगा! उसे हम छोड़ते जाते हैं। नया काम सीखते हैं, उसमें मन लगाते हैं, उसमें हमारे अपने #मन_की_बात होती है।...और यह केवल हमारे ऊपर नहीं होता बल्कि परिस्थितियों के अंतर्विरोध आपको ऐसा करने लिए मजबूर करते हैं।...

बड़े से बड़ा भक्त, उसकी भक्ति, पूजा-अर्चना सब इसी तरह संचालित होते हैं!...
उदाहरण देख लीजिए!...

https://youtu.be/-HRucq7l3is

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