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आत्मालाप-18: ये किसकी जीत ये किसकी हार...

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                                  तंत्रलोक के किस्से यार                                                     - अशोक प्रकाश तंत्रलोक के किस्से यार ये किसकी जीत ये किसकी हार। इक हौली में चार पियक्कड़ अक्कड़ बक्कड़ लाल बुझक्कड़ तय है वादा तय है रोना तय है खोना तय है सोना तय है किस पर पड़नी मार... ये किसकी जीत ये किसकी हार! रामसिंह के रमरजवा नौकर किसके पेट पे किसकी ठोकर चार हजार में कर मज़दूरी रामसिंह कहें ये मजबूरी किसके सइकिल किसके कार... ये किसकी जीत ये किसकी हार! खेती-बाड़ी मुश्किल काम दिन आराम न रात आराम खाद-बीज-पानी के चक्कर राधाकृष्ण बन गये घनचक्कर उमर हो गई सत्तर पार... ये किसकी जीत ये किसकी हार! बड़का लड़का पड़ा बीमार नौकरी-चाकरी कुछ न यार छोटकी की पहले परवाह कैसे होगा इसका ब्याह क्षीण पड़ रही जीवन-धार... ये किसकी जीत ये किसकी हार! ★★★★

करतार सिंह सराभा शहादत-दिवस

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शहादत दिवस:                     अंग्रेजी राज के लिए सबसे बड़ा खतरा':                          क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा                                                   प्रस्तुति : सुनील सिंह “हे भगवान मेरी यह प्रार्थना है कि मैं भारत में उस समय तक जन्म लेता रहूँ, जब तक कि मेरा देश स्वतंत्र न हो जाये!”... फाँसी पर चढ़ने से पहले ये शब्द थे 19 साल के उस भारतीय क्रांतिकारी नौजवान के -जिसे ब्रिटिश मानते थे ‘अंग्रेजी राज के लिए सबसे बड़ा खतरा’. मुकदमे के दौरान ब्रिटिश जज के आरोपों के जवाब में करतार सिंह ने पंजाबी में कहा था, “सेवा देश दी जिंदड़िये बड़ी औखी गल्लां करनियां ढेर सुखल्लियाँ ने जिन्हें देश सेवा विच पाइर पाया ओहना लाख मुसीबतां झल्लियां ने”. सिर्फ 19 साल की उम्र में देश के लिए फांसी के फंदे पर झूल जाने वाले इस सपूत को ...

किसानों का 'दिल्ली चलो!':

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प्रेस-विज्ञप्ति:                           29-30 नवम्बर दिल्ली चलो! मोदी सरकार द्वारा किसानों के साथ की गयी धोखाधड़ी के खिलाफ देश भर से किसानों का “दिल्ली मार्च”: साथियों! 2014 के लोकसभा चुनाव में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा ने देश के किसानों से कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुरूप फसलों का डेढ़ गुना दाम देने का वायदा किया था. यही नहीं उन्होंने देश के लोगों को अच्छे दिन लाने का वायदा भी किया था. पर अपने साढे चार साल के शासन में इस सरकार ने न सिर्फ देश के किसानों के साथ खुला धोखा किया बल्कि अपनी कारपोरेट परस्ती के कारण आज देश को आर्थिक कंगाली के कागार पर खड़ा कर दिया है. जो मोदी सरकार घाटे की खेती के कारण आत्महत्या को मजबूर देश के किसानों की कर्ज माफी को तैयार नहीं है, वही सरकार देश के सभी संशाधनों पर कब्जा जमा कर अति मुनाफ़ा लूट रहे देश के बड़े पूंजीपतियों का साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए का बैंक कर्ज इसी साल बट्टे खाते में डाल चुकी है. इस सरकार ने अपने एक चहेते पूंजीपति के लिए जहां...

नज़ीर अकबराबादी की दीवाली

                                दीवाली...                                       - नज़ीर अकबराबादी हमें अदाएँ दिवाली की ज़ोर भाती हैं । कि लाखों झमकें हरएक घर में जगमगाती हैं ।। चिराग जलते हैं और लौएँ झिलमिलाती हैं । मकां-मकां में बहारें ही झमझमाती हैं ।। खिलौने नाचें हैं तस्वीरें गत बजाती हैं । बताशे हँसते हैं और खीलें खिलखिलाती हैं ।।1।। गुलाबी बर्फ़ियों के मु‘ँह चमकते-फिरते हैं । जलेबियों के भी पहिए ढुलकते-फिरते हैं ।। हर एक दाँत से पेड़े अटकते-फिरते हैं । इमरती उछले हैं लड्डू ढुलकते-फिरते हैं ।। खिलौने नाचें हैं तस्वीरें गत बजाती हैं। बताशे हँसते हैं और खीलें खिलखिलाती हैं ।।2।। मिठाइयों के भरे थाल सब इकट्ठे हैं । तो उन पै क्या ही ख़रीदारों के झपट्टे हैं ।। नबात[1], सेव, शकरकन्द, मिश्री गट्टे हैं । तिलंगी नंगी है गट्टों के चट्टे-बट्टे हैं ।। खिलौने नाचें हैं तस्वीरें गत बजाती हैं। बता...

आत्मालाप-17: भाग्य से न कुछ मिले...

                                    एक कुपद                                            -अशोक प्रकाश भाग्य क्या है? -तुम न जानो, जो भरे हो भूतभ्रम मन में, उसे ही भाग्य मानो। देखकर भी देखते बिल्कुल नहीं तुम, श्रमिक का श्रम है किसी से तो नहीं कम कितना श्रम हैं कर रहे आकाश वाले महल की ऊंचाइयां हैं लूट का श्रम फायदा है न इसी में? बैठो संग में बूटी छानो। अज्ञान का किस्सा सुना था एक जो आकाश की उम्मीद झूठी ही थी वो श्रम का अपना फल भी थे पाये नहीं तो इक भरोसे पर लो जीवन पार कर लो तो चलो आश्वासनों की एक लंबी चादर तानो। माना श्रम से ही बने सुंदर किले बोलो इनमें किसके थे तो दिन खिले राजा-नवाबों के ही इनमें दिल मिले मांगी गर मजदूरी तेरे मुंह सिले भाग्य से न कुछ मिले इसलिए संघर्ष ठानो।                       ★★■★★

आत्मालाप-16: इस रात की कोई दीवाली नहीं!..

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                                कोई दिवाली नहीं!... इस रात की  कोई दिवाली नहीं!... फूल बिके नहीं,  कर्ज़ कैसे लौटेगा,  पता नहीं!... सोच में डूबे वहीं पर खो गये रात सिरहाने टिकाए सो गये!...    ★★★

आत्मालाप-15: कबिरा तेरे नगर में...

                      कबिरा तेरे नगर में...                                                     -अशोक प्रकाश                 कबिरा तेरे नगर में घुस आया शैतान।               चेतन चौकी फूंककर बन बैठा भगवान।।               जुटते रोज़ वहां दिखें पंडे अरु जजमान।               जीमें भोज हराम का सोयें चादर तान।।              कबिरा तेरे नाम पे कितने मठ अरु पीठ।                मंत्र मारता है फिरे पांड़े कितना ढीठ।।            वह बज़ार जिसमें खड़ा लिए लुकाठा हाथ।            कबिरा तू ही बिक गया मारा फिरे अनाथ।।     ...