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ये किसका घर तोड़ा है तूने?...

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                            ये किसका घर तोड़ा है तूने?                  पानी बिन जाता जनवा तूरि ले मकनवा...            अधिकारियों से अनेक बार अनुनय-विनय करने के बावज़ूद भोजपुरी के लोककवि विनोद मित्रा का घर तोड़ दिया गया!... जब घर तोड़ा जा रहा था विनोद मित्रा बेहोश हो गए! बेहोशी हालात में उन्हें अस्पताल ले जाया गया।...लौटे तो घर की जगह घर का मलवा पड़ा था! बाल-बच्चे बेघर!... उन्हीं मनःस्थितियों में कवि द्वारा यह मार्मिक भोजपुरी लोकगीत लिखा गया। उन्होंने अपनी आपबीती को कुछ इस तरह सुनाया! -- पानी बिन जाता जनवा तूरि ले मकनवा धनवा लूटि ले गइले ना! तड़पे धूप में परनवा धनवा लूटि ले गइले ना!... दिन दुपहरिया के रतिया अंधरिया में संझवा के सखी संग रहले कोठरिया में चोरवा चिकरवा पे कईला विचरवा धनवा लूटि ले गइले ना! तड़पे धूप में परनवा धनवा लूटि ले गइले ना!... सेठ साहूकार मिलि गांव के जमीदरवा हो धरती माता पे कइले बाटे अधिकरवा हो हमके...

राजस्थान ओलावृष्टि

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                                      ओलावृष्टि से                                          किसानों की तबाही राजस्थान लगभग हर साल अजीबोगरीब मौसम की मार झेलता है। लू और भयानक गर्मी तथा उतनी ही सर्द हवाओं के लिए विख्यात राजस्थान, पिछले कई सालों की तरह इस साल 2019 के अप्रैल महीने में भी एक भयंकर ओलावृष्टि और तेज हवाओं का शिकार हुआ। इस ओलावृष्टि और तेज हवाओं की मार से अलग-अलग स्थानों पर कम से कम 25 लोग मौत के शिकार हुए हैं तथा इससे भी ज़्यादा घायल हुए हैं! ... https://youtu.be/6VA-3jBYx20 इस भयंकर ओलावृष्टि से सबसे अधिक तबाही किसानों की हुई है। एक अनुमान के अनुसार इससे कम से कम 240 करोड़ का तैयार अनाज बर्बाद हो गया है। इसके अलावा गेहूँ, जौ आदि अनाजों के साथ पपीता तथा अन्य तैयार सब्जियों की भी भारी हानि हुई है।  यद्यपि राज्य और केन्द्र सरका...

एक निराला बाँसुरीवाला..

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                                       एक निराला                                     बाँ सु री वा ला !... हमारा देश बड़ा विचित्र है। यहाँ एक तरफ एक से बढ़कर एक कलाकार गली-गली धूल फांकते मिल जायेंगे तो दूसरी तरफ केवल परिवार और खानदान के नाम पर कुछ लोग असाधारण कलाकार बन जाएंगे!... जिसके पास पैसा है, प्रचार-प्रसार, विज्ञापन का साधन है वह साधारण होकर भी असाधारण और जो अभावग्रस्त है, जिसके पास पास प्रचार-प्रसार के लिए संसाधन नहीं है, वह असाधारण होकर भी साधारण! किन्तु ऐसा भी नहीं कि यह कोई अकाट्य नियम है या ऐसा ही होता है।...इन्हीं में से कुछ साधारण लोग, आम लोग असाधारण और खास होते भी देखे गए है। आप छोटे-बड़े पर्दों पर बड़े-बड़े कलाकारों को देखते होंगे जो मशहूर होने के साथ-साथ बड़ी धन-संपदा के मालिक हैं। इन्हीं में से कुछ साधारण लोगों को भी धीरे-धीरे आप मशहूर और 'बड़ा-आदमी' बनते देखे हों...

आंगनबाड़ी: नियमित रोज़गार का संघर्ष

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नियमित रोज़गार का संघर्ष:                                       आंगनबाड़ी:                     मानदेय बनाम नियमित वेतन का संघर्ष                                     पूरे देश में महिलाओं और बच्चों की देखभाल के लिए भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे  समेकित बाल विकास योजना का एक मुख्य कार्यक्रम है- आंगनबाड़ी  केंद्रों की स्थापना। इसके तहत देश में लगभग 13 लाख आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। उत्तर प्रदेश में इसके अंतर्गत लगभग साढ़े तीन लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को मानदेय पर रखा गया है।               उत्तर प्रदेश में लगभग 1 लाख 66 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और लगभग इतनी ही सहायिकाओं की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा लगभग 22 हजार मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी रखी गई हैं।...

चुनाव चर्चा :5 :: पुरानी पेंशन

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                                 क्या बहाल होगी                                      पुरानी पेंशन?...                     https://youtu.be/PXtlaq8_9Ug                पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन का आज एक जीवंत नाम हो गया है - 'अटेवा'! अटेवा 'बुढ़ापे की लाठी' अर्थात् 'पुरानी पेंशन' की एकमात्र मांग को लेकर आज एक व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है। सभी सरकारी-सहायता प्राप्त शिक्षक-कर्मचारियों के अलावा लगभग हर सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों का इसे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है। लम्बे समय से संघर्षरत और उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी जन-जागरूकता फैला चुका यह संगठन 30 अप्रैल को दिल्ली में बड़ी रैली के अलावा देश भर में अनेक रैलियां कर चुका है।...            एक तर...

चुनाव चर्चा :5 :: पुरानी पेंशन

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                                 क्या बहाल होगी                                      पुरानी पेंशन?...                       https://youtu.be/PXtlaq8_9Ug                पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन का आज एक जीवंत नाम हो गया है - 'अटेवा'! अटेवा 'बुढ़ापे की लाठी' अर्थात् 'पुरानी पेंशन' की एकमात्र मांग को लेकर आज एक व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है। सभी सरकारी-सहायता प्राप्त शिक्षक-कर्मचारियों के अलावा लगभग हर सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों का इसे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है। लम्बे समय से संघर्षरत और उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी जन-जागरूकता फैला चुका यह संगठन 30 अप्रैल को दिल्ली में बड़ी रैली के अलावा देश भर में अनेक रैलियां कर चुका है।...           ...

बंदी के कगार पर...

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                                  बन्दी के कगार पर                               कुटीर धंधे और कारोबार https://youtu.be/M3woWZY89xk           अलीगढ़ जिला अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अलावा अपने ताला-चाभी, आर्टवेयर, हार्डवेयर,पीतल कारोबार, बिजली फिटिंग आदि कारोबार के लिए पूरे देश और दुनिया में जाना जाता रहा है। यहां इस तरह के  कारोबारों की छोटी-बड़ी लगभग पांच  हजार इकाइयां हैं जिनसे लगभग पांच लाख लोग किसी न किसी रूप में अपनी आजीविका चलाते हैं।            किन्तु आज यहां का यह कारोबार चौपट होने की कगार पर है। चीन निर्मित तालों एवं अन्य सम्बंधित सामानों के आयात ने जहां इसकी कमर तोड़ी है वहीं कारोबार संबर्द्धन  के लिए कोई ठोस नीति न होने से मुख्यतः छोटे और मध्यम कारोबार प्रभावित हुए हैं।  जीएसटी के चलते बड़े कारोबारी भी परेशान हैं।   ...