माटी के गीत-१ :


बघेली किसानी-गीत:

      
       'पानी परिगा, पथरा परिगा सरि गई सगरी पियाजु
                       किसनवा कै मरही होइ गै रे!..'

देश का किसान आज एक अभूतपूर्व स्थिति से गुज़र रहा है। जहां भूमिहीन किसान-मजदूर शहरों की तरफ भाग कर दिहाड़ी-मज़दूर बनकर जैसे-तैसे ज़िन्दगी काटने को मजबूर हैं, वहीं छोटे-मझोले किसान खाद-बीज-पानी-बिजली के अलावा कर्ज़ के शिकार होने के कारण लगातार बदहाल हो रहे हैं!...
        ऐसी ही स्थितियों को बयां करता है बघेली का यह मार्मिक किसानी-गीत:


                                              साभार-राजेश मिश्र, यू-ट्यूब

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