चुनाव-चर्चा : 4 :
चुनाव-चर्चा: 4 :
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के
चुनाव घोषणा पत्र में
किसान एजेंडा
"10: किसानों की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की गारंटी होगी
मोदी सरकार ने मुश्किलों से जूझते किसानों के प्रति बेहद क्रूरता भरा और अपमानजनक व्यवहार किया है. पिछले बजट में सरकार ने किसानों के 'सम्मान' में एक योजना की शुरुआत की जिसमें किसान परिवार के हर सदस्य के लिए केवल तीन रुपए तीस पैसे प्रतिदिन का प्रावधान किया गया.
हम निम्नलिखित बिन्दुओं पर तत्काल कार्यवाही करेंगे :
क: किसानों के मुद्दों और कृषि संकट पर संसद का विशेष सत्र बुलाया जायेगा और 30 नवम्बर 2018 को किसान मुक्ति मार्च द्वारा दिल्ली में आयोजित किसान संसद में प्रस्तावित दोनों कानूनों को पारित किया जायेगा . इनमें किसानों को फसल के सकल लागत मूल्य से 50 फीसदी अधिक कीमत की गारंटी करने वाले किसान ‘कृषि उत्पादों के लिए सुनिश्चित मूल्य कानून 2017’ और किसानों के संस्थागत व गैर-संस्थागत सभी बकाया कर्ज़ों को समाप्त करने के लिए ‘किसानों की कर्ज़ से मुक्ति कानून 2017’ शामिल हैं.
ख: संकटग्रस्त इलाकों में आपदाओं के दौरान कर्ज़ चुकाने की क्षमता बहाल होने तक गैर-सांस्थानिक स्रोतों समेत सभी संस्थानों की कर्ज़ वसूली पर प्रतिबंध लगेगा .
ग: बजट सत्र में विशेष किसान बजट पारित किया जायेगा .
घ: स्वामीनाथन किसान आयोग की किसान-हित में सिफारिशों को लागू किया जायेगा .
च: हदबंदी में बची हुई, भूदान और फाज़िल जमीनों का गरीबों-भूमिहीनों में वितरण किया जायेगा .
छः खेती और जंगल की जमीनों को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपने पर रोक लगेगी .
ज: सिंचाई के साधनों में निवेश बढ़ाया जायेगा व किसानों के लिए लगातार और बराबर पानी की गारंटी की जायेगी .
झ: सभी किसान परिवारों को खेती के लिए ब्याज मुक्त सांस्थानिक कर्ज़ की गारंटी होगी .
ट: बँटाईदारों और महिला किसानों को 'किसान' का दर्जा मिलेगा ताकि उनको योजनाओं के सभी लाभ हासिल हो सकें.
ठ: भूमि अधिग्रहण (संशोधन) कानून 2015 को संसद से वापस लिया जायेगा .
ड: भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना कानून 2013 के उचित मुआवजा व पारदर्शिता के प्रावधानों के विरुद्ध बने सभी राज्य स्तरीय भूमि अधिग्रहण कानूनों को समाप्त करेंगे और एक कृषि भूमि संरक्षण कानून बनाया जायेगा.
ढ: जबरन भूमि अधिग्रहण रद्द किये जायेंगे और इस तरह अधिगृहीत जमीनों को वापस किया जायेगा. खेती का कारपोरेटीकरण बंद होगा.
त: भारत के बीज बाजार पर मोन्सांटो व करगिल जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के बढ़ते एकाधिकार पर रोक लगेगी. अपने बीजों के संरक्षण के साथ किसानों के बीज पर अधिकार की गारंटी होगी. एग्रो-प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, सिंचाई व कृषि-बाजारों के नेटवर्क जैसी आधुनिक कृषि सुविधाएँ मुहैय्या करायी जायेंगी.
थ: केंद्र सरकार की उस किसान विरोधी अधिसूचना को रद्द किया जायेगा जो मवेशी बाजार में मवेशियों की खरीद फरोख़्त पर रोक लगाती है. गौरक्षा कानूनों को समाप्त किया जायेगा क्योंकि इनके चलते न सिर्फ़ डेयरी किसान बल्कि खेती करने वाले लोग भी तबाह हो रहे हैं और इसका इस्तेमाल मुसलमान अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न व हत्या करने के लिए किया जा रहा है.★■★
चुनाव घोषणा पत्र में
किसान एजेंडा
"10: किसानों की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की गारंटी होगी
मोदी सरकार ने मुश्किलों से जूझते किसानों के प्रति बेहद क्रूरता भरा और अपमानजनक व्यवहार किया है. पिछले बजट में सरकार ने किसानों के 'सम्मान' में एक योजना की शुरुआत की जिसमें किसान परिवार के हर सदस्य के लिए केवल तीन रुपए तीस पैसे प्रतिदिन का प्रावधान किया गया.
हम निम्नलिखित बिन्दुओं पर तत्काल कार्यवाही करेंगे :
क: किसानों के मुद्दों और कृषि संकट पर संसद का विशेष सत्र बुलाया जायेगा और 30 नवम्बर 2018 को किसान मुक्ति मार्च द्वारा दिल्ली में आयोजित किसान संसद में प्रस्तावित दोनों कानूनों को पारित किया जायेगा . इनमें किसानों को फसल के सकल लागत मूल्य से 50 फीसदी अधिक कीमत की गारंटी करने वाले किसान ‘कृषि उत्पादों के लिए सुनिश्चित मूल्य कानून 2017’ और किसानों के संस्थागत व गैर-संस्थागत सभी बकाया कर्ज़ों को समाप्त करने के लिए ‘किसानों की कर्ज़ से मुक्ति कानून 2017’ शामिल हैं.
ख: संकटग्रस्त इलाकों में आपदाओं के दौरान कर्ज़ चुकाने की क्षमता बहाल होने तक गैर-सांस्थानिक स्रोतों समेत सभी संस्थानों की कर्ज़ वसूली पर प्रतिबंध लगेगा .
ग: बजट सत्र में विशेष किसान बजट पारित किया जायेगा .
घ: स्वामीनाथन किसान आयोग की किसान-हित में सिफारिशों को लागू किया जायेगा .
च: हदबंदी में बची हुई, भूदान और फाज़िल जमीनों का गरीबों-भूमिहीनों में वितरण किया जायेगा .
छः खेती और जंगल की जमीनों को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपने पर रोक लगेगी .
ज: सिंचाई के साधनों में निवेश बढ़ाया जायेगा व किसानों के लिए लगातार और बराबर पानी की गारंटी की जायेगी .
झ: सभी किसान परिवारों को खेती के लिए ब्याज मुक्त सांस्थानिक कर्ज़ की गारंटी होगी .
ट: बँटाईदारों और महिला किसानों को 'किसान' का दर्जा मिलेगा ताकि उनको योजनाओं के सभी लाभ हासिल हो सकें.
ठ: भूमि अधिग्रहण (संशोधन) कानून 2015 को संसद से वापस लिया जायेगा .
ड: भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना कानून 2013 के उचित मुआवजा व पारदर्शिता के प्रावधानों के विरुद्ध बने सभी राज्य स्तरीय भूमि अधिग्रहण कानूनों को समाप्त करेंगे और एक कृषि भूमि संरक्षण कानून बनाया जायेगा.
ढ: जबरन भूमि अधिग्रहण रद्द किये जायेंगे और इस तरह अधिगृहीत जमीनों को वापस किया जायेगा. खेती का कारपोरेटीकरण बंद होगा.
त: भारत के बीज बाजार पर मोन्सांटो व करगिल जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के बढ़ते एकाधिकार पर रोक लगेगी. अपने बीजों के संरक्षण के साथ किसानों के बीज पर अधिकार की गारंटी होगी. एग्रो-प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, सिंचाई व कृषि-बाजारों के नेटवर्क जैसी आधुनिक कृषि सुविधाएँ मुहैय्या करायी जायेंगी.
थ: केंद्र सरकार की उस किसान विरोधी अधिसूचना को रद्द किया जायेगा जो मवेशी बाजार में मवेशियों की खरीद फरोख़्त पर रोक लगाती है. गौरक्षा कानूनों को समाप्त किया जायेगा क्योंकि इनके चलते न सिर्फ़ डेयरी किसान बल्कि खेती करने वाले लोग भी तबाह हो रहे हैं और इसका इस्तेमाल मुसलमान अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न व हत्या करने के लिए किया जा रहा है.★■★

सारे घोषणा पत्र चुनावी वादे लगते हैं जो कभी नहीं पूरे होते..
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