Posts

अमेज़ॉन के जंगल कौन बचाएगा?

Image
पर्यावरण:                      अमेज़ॉन के जंगल कौन बचाएगा?  'धरती के फेफड़े' अमेज़ॉन के जंगलों की आग मुनाफालोभियों की करतूत है। अमेज़ॉन के ये जंगल पूरे विश्व की 20 फीसदी ऑक्सीजन के पैदा करने वाले रहे हैं!.. किन्तु आज ये जंगल, तमाम सारे जंगल के प्राणी, पेड़-पौधे, वनस्पतियां त्राहि-त्राहि कर रहे हैं! वहाँ की मुनाफालोभियों की पोषक सरकार बहाने बना रही है या उन्हें सपोर्ट कर रही है। ये मुनाफालोभी हमारे देश में भी हैं! दरअसल, मानवता के ये दुश्मन किसी देश के नहीं हैं! मुनाफा ही उनका देश है, मुनाफालोभी ही उनके दोस्त-यार हैं! अगर हम इनसे बचने के उपाय न खोज पाए तो पूरी धरती को ये तबाह कर देंगे! खुद भी कहाँ और कब तक बचेंगे?...ये इस तबाही को 'विकास' नाम देते हैं!              ऐसी होती है मानवद्रोहियों की नीति! इनसे खुद बचिए, धरती को बचाइए!...

#uid #आधार किसलिए?..

Image
                              #uid #आधार किसलिए?..                   https://youtu.be/dQGlaJZtFFA               यह एक साधारण प्रश्न है?... इसके विशेष तकनीकी पहलुओं, आधारकार्ड को लेकर एक नागरिक की निजता पर उठाए जाते सवालों आदि को अंदाज़ कर दिया जाय तो क्या इस विशिष्ट पहचान नम्बर/कार्ड का सचमुच किसी नागरिक की पहचान से कोई सरोकार है?..यह प्रश्न एक नागरिक द्वारा प्रेषित एक वीडियो के चलते उठाया जा रहा है।           वाराणसी या जौनपुर का निवासी एक वृद्ध व्यक्ति उम्र के चलते , परेशानी के चलते अपना गांव-पता ठीक से नहीं बता पा रहा। वह घर जाने, घर वालों से मिलने के लिए लगातार रो रहा है। एक सज्जन उसकी मदद करना चाहते हैं किंतु एक सीमा के आगे वे असहाय हैं। वे सोशल मीडिया पर अपील करते हैं कि इस व्यक्ति की मदद की जाय!...                सवाल है कि आधार कार्ड बनाते समय किस...

आत्मालाप-26: समय आ गया है...

Image
                              समय आ गया है...                                             - अशोक प्रकाश समय आ गया है कि हम पहले ताली बजायें फिर अपनी पीठ थपथपाएँ कि... 'आपके अवशेष और वेतन भुगतान हेतु स्वीकृत बजट विधान सभा और विधान परिषद में प्रस्तुत कर दिया गया है... और जल्दी ही दोनों जगहों से पारित हो जाएगा।...' इसलिये जरूरी है कि हम इस पर कोई सवाल न उठाएं सिर्फ़ ताली बजायें मसलन... घोषणाओं को मिल गया, मिल गया- बतायें क्या-क्या नहीं मिला या चला गया... - ऐसे सवाल नहीं उठाएं... नीला, हरा होते हुए जो भगवा हो गया है उसकी विजय-पताका फहरायें इसे शिक्षक समुदाय की बहुत बड़ी जीत बताएं जोर-जोर से चिल्लाएं! उसे विधानसभा या संसद पहुंचाने का जश्न मनायें अभी से माला पहनाएं! समय आ गया है उसे नेता बनाएं खुद भाड़ में जाएं!....               ...

आत्मालाप-25: हे मूर्तियों...

                               हे मूर्तियों!...                                              - अशोक प्रकाश हे मूर्तियों, तुम्हारा अमूर्तन कीर्तन अब न कोई सुनेगा न कोई समझेगा! जबकि वे मॉबलिंचिंग को समय का मुहावरा बता रहे हैं तुम्हारे घर को ही तुम्हारा दुश्मन बना रहे हैं तुम शांतिपाठ के नए श्लोक गढ़ रहे हो विराट-यज्ञ की आहुति के धूम्रपाल बन रहे हो!.. हे धूम्रपाल, भ्रमपाल होने का समय गया तुम्हारी पोथियों में नहीं रहा कोई दम संसार सूर्य और चंद्र का ग्रहण कर रहा है यथार्थ की धरती पर मुक्तिबोध और मृत्युबोध की जगह मुक्तिमार्ग का वरण कर रहा है!... समर्पण का कोई भी विन्यास मानव-सभ्यता के विकास का उपहास है विकास और विनाश का कोई भी भ्रम सिर्फ़ जड़ता और कायरता का एक और संन्यास है!...                       ...

आत्मालाप-23: 'शब्दार्थ'

                                    शब्दार्थ                                                 -  अशोक प्रकाश शब्द ही नहीं ढोते हमेशा अर्थ समय भी ढोता है समाज और उसका इतिहास भी ढोता और गढ़ता है शब्द के नए अर्थ!.. शब्द का ब्रह्मार्थ गायब हो चुका है गूढार्थ और भावार्थ के मुखौटे उतर चुके हैं जंगल पहाड़ और नदियां बता रही हैं शब्द के सच्चे अर्थ धरती की कोख से उग रहे हैं अभिधार्थ!... हे अर्थवान लोगों, तुम्हारे पास ज़्यादा नहीं है वक़्त शब्द को निरर्थक बनाने की तुम्हारी कोशिश तुम्हें ही बना देगी निरर्थक संभल जाओ! ★★★★★

श्री चमाराजेंद्र Mysuru #Zoological_Garden

Image
                                    मैसूर का                                 श्री चमाराजेंद्र                #Mysuru #Zoological_Garden                    https://youtu.be/UFxjqf_mXo0                                           हिन्दुस्तान ही नहीं,  बल्कि सभी एशियाई देशों के सर्वाधिक पुराने जूलोजिकल गार्डेन में से एक है मैसूर का श्री चमाराजेंद्र जूलोजिकल गार्डेन या चिड़ियाघर.  सन १८९२ में मैसूर के तत्कालीन नरेश श्री चमाराजेंद्र वाडेयर  द्वारा स्थापित यह चिड़ियाघर मूलतः एक ज़र्मन उद्यान –विशेषज्ञ और प्रकृति-प्रेमी जी.एच.क्र्म्बायज़ेल की संरचना है. पहले यह मात्र १० एकड़ की परिधि में बना था जो विकसित होते हु...

चटपटा सिनेमा नहीं है साहित्य

Image
                    चटपटा सिनेमा नहीं हो सकता साहित्य                                                                                                           - डॉ. मिश्कात आब्दी                   https://youtu.be/3sGCKR92fw8 चटपटा सिनेमा नहीं हो सकता साहित्य!...उसकी मर्यादाएं अलग हैं. वह जीवन की सर्वांगीण व्याख्या का प्रयास है जबकि सिनेमा का मुख्य काम है- मनोरंजन!...यद्यपि यह सच है कि सिनेमा ज़्यादा जीवंत, ज़्यादा मुखर होता है पर साहित्य की संवेदना और विचार-प्रवणता कहीं ज़्यादा प्रभावशाली और दीर्घकालिक होती है! वह हमारे जीवन का हिस्सा बन जाता है. जबकि सिनेमा का प्रभाव अपेक्षतया अल्पकालिक होता है.      https:/...