शादीकार्ड की फजीहत
विवाह का शुभकामना संदेश! आजकल ज़्यादातर शादियाँ घर पर नहीं होतीं। प्रायः लोग कहीं कोई मैरिज होम/हाल बुक करते हैं। शायद इसीलिए कॉर्ड का चलन हुआ। ताकि पता लग सके कि आमंत्रितों को कहाँ जाना है। अजीब बात है कि इसे इस बात से भी जोड़ दिया गया है कि किस रिश्ते को महत्व देना है, किसे नहीं। दामाद, बहनोई, मामा, फूफा, उनके नजदीकी रिश्तेदार, दोस्त-यार से होते हुए लिस्ट समाज के महत्त्वपूर्ण परिचित व्यक्तियों, काम में आने वाले या आ सकने वाले व्यक्तियों तक पहुँचती है। जातिगत रिश्तों में एम.पी.-एम.एल.ए., भूतपूर्व मंत्री-संत्री, मठाधीश, संस्थाओं के अध्यक्ष-मंत्री आदि विशेष आमंत्रित व्यक्ति होते हैं। इधर कुछ सालों से वैचारिक रिश्तों को भी महत्व मिलने लगा है। अम्बेडकरवादियों और प्रगतिशीलों या मार्क्सवादियों के लिए यह बड़ा मुश्किल फैसला होता है। समाज ढकोसलों-आडम्बरों से भरा है, पर शादी-व्याह तो उसी समाज में करना है। जरूरी नहीं कि शादी वाला...