अम्बेडकरवाद से बड़े अम्बेडकरवादी?..
जय भीम!..जय अर्जुन!! अम्बेडकरवाद से बड़े अम्बेडकरवादी?.. राजनीतिक चोर-डकैत-नीति चोरों-डकैतों का गिरोह जनता से ज़्यादा संगठित देखा गया है। शहरों में चोर आग लगाने और आग बुझाने दोनों काम मिल-बांटकर तयकर करते हैं! ध्यान बंटाने का काम भी बंटा होता है। जनता से ज़्यादा तेज बोलना, हो सके तो अपने आदमी को बचाने के लिए जनता के बीच के ही किसी कमजोर आदमी को पीटने लगना और साथी की भगा देना, ये सब चोर-नीति का हिस्सा है।... कुछ राजनीतिक लोग और दल चोर डकैत क़िस्म के होते हैं। आसानी से काम हो जाय तो चोरी, गुंडई के साथ काम सिद्ध करना पड़े तो डकैती। वे यह चोर-डकैत-नीति तमाम राजनीतिक मसलों पर भी लागू करते हैं।....उदाहरण के तौर पर डॉ. अम्बेडकर के साथ जुड़े दलित-वोट को पाने और भरमाने के लिए सबसे बढ़-चढ़कर डॉ. अम्बेडकर की पूजा, ज़्यादा चंदा, ज़्यादा बड़ी झांकी, प्रसाद आदि का इंतज़ाम उनकी इस नीति का सफल प्रयोग है। गरीबी, समुचित चेतना के अभाव, सदियों से चली आई पूजा-पद्धति का प्रभाव और विशेषकर दलाल टाइप नेताओं क...


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