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किसानों पर आफ़त

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                                    किसानों पर आफ़त देश की रीढ़ कही जाने वाली हमारी खेती-बाड़ी पर बढ़ता ख़तरा हमारी ज़िंदगी पर, हमारे भविष्य पर मंडराने वाला शायद सबसे बड़ा खतरा है!... पिछले लगभग बीस सालों में उत्तर भारत के हरे-भरे खेतिहर मैदानों में नीलगाय, जंगली सूअर आदि बेतहासा बढ़े हैं। ये जंगली जानवर खेतों को बर्बाद करने के साथ-साथ जब तब इंसानों पर भी हमला करते हैं। आशंका व्यक्त की जा रही है कि सरकारों द्वारा बहुराष्ट्रीय कंपनियों को 'कॉरपोरेट खेती' करने की छूट देने के साथ-साथ किसानों की ज़िंदगी में इस तरह की आफत आई है।  जब अवध के इलाकों में जगह-जगह जंगल-झाड़ियां थीं तब भी इन जानवरों को कहीं नहीं देखा गया था। इनकी जगह पर अनेक दूसरे जानवर जैसे स्याही, सियार-गीदड़, लकड़बग्घे आदि जानवर थे जिनसे कम से कम खेती को कोई खतरा नहीं था।....वे आज कम हो रहे हैं। किंतु ये बड़े जानवर जिनके ठहरने के जंगली इलाके इन क्षेत्रों में प्रायः नगण्य हैं, बढ़ते जा रहे हैं और आये दिन खेती के साथ-साथ इंसानों ...

एक और कर्ण

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                  एक और कर्ण: किसी की तलाश है उसको                             बहुजन नेता कहाँ  रहते हैं? हमारे देश में हर एक को किसी न किसी की तलाश है!... ऐसी ही तलाश शायद पूरी दुनिया को भी हो!... वंचित समाज एक पूरा वंचित देश है, दुनिया है.  इन्हीं वंचितों में से है- एक और कर्ण !... उसे महाभारत के कर्ण की तरह न तो किसी राजा की तरह युद्ध में शामिल किया गया है, न ही उसकी कोई पहचान है. फिर भी वह हर कहीं दिख जाता है: जीवन बचाने का, अस्तित्त्व बचाने का संघर्ष करता हुआ!... एक युद्ध लड़ता हुआ!... महाभारत के कर्ण की तरह उसे दानवीर होने का कोई मुगालता नहीं!किन्तु वह  किसी से भीख भी नहीं मांगता!... वह जीवन जी सकने के एक ऐसे महाभारत में शामिल है जिसमें उसके सहयोगी केवल उसके  मां-बाप हैं. इस महाभारत के कर्ण की जमीन छीन ली गई।...शायद इसीलिए कि वह दलित समाज के कमजोर तबके का है!...उसकी कोई बहनजी या भाईजी, तथाकथित बहुजन-सर्वजन समाज का रानी या राजा ...

नीम का एक देवता

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                                  नीम का देवता                             एक ग्राम देवता की कहानी हमारे ग्राम देवता अनेक रूप धारण कर आते हैं।  इन देवताओं में देवियों के स्वरूप भी हैं और देवों के भी।  ये प्रायः इंसानों के सर पर सवार होकर आते हैं, पर कभी-कभी इनका अवतरण पौधो और जानवरों के रूप में भी होता है। https://youtu.be/7ISEjZDBK_M अलग-अलग इलाकों में वहाँ फैलने वाली बीमारियों, अक्सर आने वाली आपदाओं, अप्राकृतिक मौतों, मौसमी विपत्तियों और न समझ में आई वाली आसमानी या जमीनी हलचलों-हरक़तों के अनुसार इन देवताओं के स्वरूप बनते-बिगड़ते देखे जा सकते हैं। इन देवताओं की भगवानों की तरह कोई निश्चित कहानियाँ या गाथायें नहीं हैं। वे देश-काल के अनुसार निर्मित होती हैं। इनमें अनेक अलौकिक-आध्यात्मिक तत्त्वों के साथ-साथ भूत-प्रेत, पिशाच, बरमबाबा, डायन, डाकिन, चुड़ैल, जिन्न, माई, मूड़कट्टन आदि आधिभौतिक तत्त्वों का अस्तित...

ये किसका घर तोड़ा है तूने?...

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                            ये किसका घर तोड़ा है तूने?                  पानी बिन जाता जनवा तूरि ले मकनवा...            अधिकारियों से अनेक बार अनुनय-विनय करने के बावज़ूद भोजपुरी के लोककवि विनोद मित्रा का घर तोड़ दिया गया!... जब घर तोड़ा जा रहा था विनोद मित्रा बेहोश हो गए! बेहोशी हालात में उन्हें अस्पताल ले जाया गया।...लौटे तो घर की जगह घर का मलवा पड़ा था! बाल-बच्चे बेघर!... उन्हीं मनःस्थितियों में कवि द्वारा यह मार्मिक भोजपुरी लोकगीत लिखा गया। उन्होंने अपनी आपबीती को कुछ इस तरह सुनाया! -- पानी बिन जाता जनवा तूरि ले मकनवा धनवा लूटि ले गइले ना! तड़पे धूप में परनवा धनवा लूटि ले गइले ना!... दिन दुपहरिया के रतिया अंधरिया में संझवा के सखी संग रहले कोठरिया में चोरवा चिकरवा पे कईला विचरवा धनवा लूटि ले गइले ना! तड़पे धूप में परनवा धनवा लूटि ले गइले ना!... सेठ साहूकार मिलि गांव के जमीदरवा हो धरती माता पे कइले बाटे अधिकरवा हो हमके...

राजस्थान ओलावृष्टि

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                                      ओलावृष्टि से                                          किसानों की तबाही राजस्थान लगभग हर साल अजीबोगरीब मौसम की मार झेलता है। लू और भयानक गर्मी तथा उतनी ही सर्द हवाओं के लिए विख्यात राजस्थान, पिछले कई सालों की तरह इस साल 2019 के अप्रैल महीने में भी एक भयंकर ओलावृष्टि और तेज हवाओं का शिकार हुआ। इस ओलावृष्टि और तेज हवाओं की मार से अलग-अलग स्थानों पर कम से कम 25 लोग मौत के शिकार हुए हैं तथा इससे भी ज़्यादा घायल हुए हैं! ... https://youtu.be/6VA-3jBYx20 इस भयंकर ओलावृष्टि से सबसे अधिक तबाही किसानों की हुई है। एक अनुमान के अनुसार इससे कम से कम 240 करोड़ का तैयार अनाज बर्बाद हो गया है। इसके अलावा गेहूँ, जौ आदि अनाजों के साथ पपीता तथा अन्य तैयार सब्जियों की भी भारी हानि हुई है।  यद्यपि राज्य और केन्द्र सरका...

एक निराला बाँसुरीवाला..

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                                       एक निराला                                     बाँ सु री वा ला !... हमारा देश बड़ा विचित्र है। यहाँ एक तरफ एक से बढ़कर एक कलाकार गली-गली धूल फांकते मिल जायेंगे तो दूसरी तरफ केवल परिवार और खानदान के नाम पर कुछ लोग असाधारण कलाकार बन जाएंगे!... जिसके पास पैसा है, प्रचार-प्रसार, विज्ञापन का साधन है वह साधारण होकर भी असाधारण और जो अभावग्रस्त है, जिसके पास पास प्रचार-प्रसार के लिए संसाधन नहीं है, वह असाधारण होकर भी साधारण! किन्तु ऐसा भी नहीं कि यह कोई अकाट्य नियम है या ऐसा ही होता है।...इन्हीं में से कुछ साधारण लोग, आम लोग असाधारण और खास होते भी देखे गए है। आप छोटे-बड़े पर्दों पर बड़े-बड़े कलाकारों को देखते होंगे जो मशहूर होने के साथ-साथ बड़ी धन-संपदा के मालिक हैं। इन्हीं में से कुछ साधारण लोगों को भी धीरे-धीरे आप मशहूर और 'बड़ा-आदमी' बनते देखे हों...

आंगनबाड़ी: नियमित रोज़गार का संघर्ष

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नियमित रोज़गार का संघर्ष:                                       आंगनबाड़ी:                     मानदेय बनाम नियमित वेतन का संघर्ष                                     पूरे देश में महिलाओं और बच्चों की देखभाल के लिए भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे  समेकित बाल विकास योजना का एक मुख्य कार्यक्रम है- आंगनबाड़ी  केंद्रों की स्थापना। इसके तहत देश में लगभग 13 लाख आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। उत्तर प्रदेश में इसके अंतर्गत लगभग साढ़े तीन लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को मानदेय पर रखा गया है।               उत्तर प्रदेश में लगभग 1 लाख 66 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और लगभग इतनी ही सहायिकाओं की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा लगभग 22 हजार मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी रखी गई हैं।...