आत्मालाप-7: ख्वाबों को अपनी जमीं पर...



                                      आत्मालाप-7
                                                         -अशोक प्रकाश

🔴 ख़्वाबों को अपने ज़मीं पर  उतारना होगा,
     अँधेरे में ग़ुम हुए सूरज को उबारना होगा!
     दिये जो आजकल घरौंदों में टिमटिमाते हैं,
     रौशनी सूरज की बनेंगे वे संभालना होगा!

    ग़मज़दा होता है रातों का सफ़र हालांकि
    सुबह के हुस्न को नज़रों में संवारना होगा!
    ऐसा कुछ भी नहीं कि वक़्त खराब आया है,
    सौ साल पहले का सोचो तो न उलाहना होगा!

   समंदर में उठी लहरों को फिर से ज़रा याद करो
   वक़्त के हर कीड़े होंगे साफ बुहारना होगा!
   वे ठग हैं ठगी करेंगे ही न तुम उनकी सोचो
   उनके हर जाल से बच्चों को निकालना होगा!
                                                🔴🔴🔴

                 

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