जिसके हाथों में लाठी है:

   
                           जिसके हाथों में लाठी है....
                                               -आचार्य बलवन्त 

जिसके हाथों में लाठी है   
उसकी है सरकार गुरू।  
अच्छे से चल रहा इन दिनों 
उसका कारोबार गुरू। 
उसी का सी.एम.,उसी का डी.एम. 
उसी का तहसीलदार गुरू। 
गाँवों के संसाधन पर 
उसी का है अधिकार गुरू। 
खूब खिलाता, खूब पिलाता 
तरह तरह से दिल बहलाता
सुबह-शाम उसके गुण गाता  
शहर का  हर अख़बार गुरू। 
अच्छे से चल रहा इन दिनों 
उसका कारोबार गुरू। 
रूप बदलकर,रंग बदलकर
बात-चीत का ढंग बदलकर 
निभा रहा है भाँति-भाँति के 
भले-बुरे किरदार गुरू।...

 जिसके हाथों में लाठी है   
उसकी है सरकार गुरू।  
अच्छे से चल रहा इन दिनों 
उसका कारोबार गुरू। ■■■


Comments

Popular posts from this blog

हम देश, हमारा देश- 1: ऐ बनारसी विकास

नियमकाल में बुलडोजर के नियम

Stephen Hawking: The man of a different human strength