उच्च शिक्षा- 7: वाह रे यूजीसी


वाह रे यूजीसी:
                                     एक अपील
                                
                           प्रस्तुति: डॉ. इला अग्रवाल
                             (SaveEducation)

वाह रे यूजीसी(UGC)!- वाह रे भारतीय उच्च शिक्षा!...जब हुक्मरान All India level पर 3%(JRF), 12%(NET) और 6% qualified को नौकारी दे ही नहीं पा रहे हैं तब अपने Unqualified भाई-भतीजों के लिए नया नियम ला कर, सभी Qualified अभ्यर्थियों के मुंह पर तमाचा मारकर अपने चापलूसों को रूपयों के दम पर Universities में Professor नियुक्त करेंगे क्या?!...
           साथियों, आप अपना विरोध UGC पर दर्ज करवाएं! वरना वो दिन दूर नहीं जब आप सभी qualified अभ्यर्थी उच्च-शिक्षा मे नौकरी की आस में दर - दर भटकेंगे! यूजीसी मेल ugcregulations2017@gmail.com यूजीसी रेगुलेशन 2018 आ रहा है जिसमें पीएचडी करने वाले ही कालेजों तथा विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की योग्यता रखेंगे। वहीं विश्व के शीर्ष 500 शैक्षणिक संस्थानों /विश्वविद्यालयों से पीएचडी की डिग्री हासिल करने वालो के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए NET /SET की आवश्यकता नहीं होगी। तो आइये इसे हम समझते हैं कि आखिरकार ऐसा नियम यूजीसी क्यों लाने जा रही है!...
            वैसे तो कुछ अपवादों को छोड़कर हुक्मरानों ने लगभग पिछले पांच साल से विश्वविद्यालयों तथा कालेजों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर अघोषित आपातकाल रूपी रोक लगायी हुई है। जिसमें बार - बार फार्म तो भरवाये जाते हैं लेकिन इंटरव्यू नहीं करवायें जाते हैं। लेकिन फिर भी विश्वविद्यालयों तथा कालेजों में शिक्षक बनने की आस लगाए देश के हजारों छात्र बैठे हैं कि शायद इस वर्ष कालेज /विश्वविद्यालयों में शिक्षक भर्ती होगी। लेकिन ऐसे समय में यूजीसी मार्च 2018 से नया रेगुलेशन ला रही है। जिसके अनुसार यदि आप विश्व के 500 शीर्ष शिक्षण संस्थानों /विश्वविद्यालयों से पीएचडी की डिग्री हासिल किए हैं तो आपको NET परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता नहीं है। अब आप सोचिये भारत के कितने संस्थान /विश्वविद्यालय शीर्ष 500 में स्थान रखते हैं? इसका जवाब है मुश्किल से भारत के लगभग 10 या 12 संस्थान/ विश्वविद्यालय इस लिस्ट में आतें हैं जिसमें से मुख्यतः आई आई टी या फिर आई आई एम ही हैं। तो अब प्रश्न आता है कि भारत के संस्थान /
विश्वविद्यालय विश्व के शीर्ष 500 में नगण्य होने पर भी सरकार इस नियम को क्यों ला रही है? इसका सीधा सा जवाब है कि धन पशुओं की जो बिगडी औलाद है जो कि विदेशों में ऐशो आराम, शान-ओ- शौकत की जिंदगी पले बढ़े हुए हैं अब धन के बल पर विदेशी विश्वविद्यालयों से पीएचडी की डिग्री खरीद कर भारतीय उच्च शिक्षा के भाग्यविधाता बनेंगे। दूसरी बात यूजीसी पीएचडी की डिग्री वालो को ही कालेज /विश्वविद्यालय में शिक्षक बनने के पात्र मानने की तैयारी कर रही है तो इसका प्रभाव किस पर पडेगा? वे छात्र जो चापलूसी की तेल लगाऊ परम्परा में पारंगत नहीं होने के कारण पीएचडी में एडमिशन नहीं ले पाते थे लेकिन फिर भी अपनी योग्यता के द्वारा NET तथा कालेज शिक्षक की परीक्षा उत्तीर्ण कर शिक्षक बनते थे, वे अब शिक्षक नहीं बन पायेंगे। जब देश में एक राष्ट्र एक शिक्षा की बात की जा रही है तो फिर एक राष्ट्र में ये दो नियम क्यों? यदि ऐसा हो गया तो वह दिन दूर जब सरकार इस देश के नागरिकों को आर्थिक आधार पर दो भागों में बांटकर जो कुछ संवैधानिक अधिकार मिले हुए है उन्हें भी छीन लिया जायेगा। आज जब हम एक राष्ट्र, एक शिक्षा, एक चिकित्सा की मांग करते हैं।.....तो इस प्रकार के रेगुलेशन लाने का क्या उद्देश्य है? कही आपको प्रधानमंत्री पकौड़ा योजना की तरफ तो धकेलने के संकेत नहीं है? सोचिए! समझिए!.... 
इसलिए आप सभी लोगों से निवेदन है कि उन समस्त छात्रों के हितों की रक्षा के लिए जो कहीं ना कहीं इस यूजीसी रेगुलेशन की भेंट चढ़ने वाले हैं -चाहे वे वंचित तबके, गरीब, ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले हों, सवर्ण, दलित, पिछडा, आदिवासी, मुस्लिम एवं उन तमाम वर्गों से आने वाले हों, ज
वे इसका शिकार होने वाले हैं। उन सभी छात्रों की आवाज बनकर छात्रों के हितों की रक्षा के लिए इस रेगुलेशन में बदलाव के लिए यूजीसी को 28 फरवरी तक मेल अवश्य करें!
                                     धन्यवाद!
     यूजीसी मेल ugcregulations2017@gmail.com

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