फागुन रंग रंगीला-4: बाजि रही पैजनियाँ...
अ व धी फा ग
प्रस्तुति: राजधर दूबे
अवधी फाग-4
बाजि रही पैजनिया छमाछम
बाजि रही पैजनिया ।
के हो गढ़ावय पांव पैजनिया
के हो कमर करधनिया ,
हां हां के हो कमर करधनिया,
के हो गढ़ावय मोहनमाला ,
के हो ऽऽ अरे के हो ,
अरे के हो गढ़ावय झुलनिया ,
छमाछम बाजि रही पैजनिया।
कइसे के टूटइ पांव पैजनिया
कइसे कमर करधनिया,
हां हां कइसे कमर करधनिया,
कइसे के टूटइ मोहनमाला
हां हां कइसे भला कइसे,
भला कइसे के टूटइ झुलनिया
छमाछम बाजि रही पैजनिया।
चलत फिरत के पांव पैजनिया
निहुरत कमर करधनिया ,
हां हां निहुरत कमर करधनिया ,
अरे लपट- झपट में मोहनमाला
हाँ चुम्मा अरे चुम्मा ,
अरे चुम्मा के लेत झुलनिया
छमाछम बाजि रही पैजनिया।।"
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