अटेवा-30 अप्रैल: पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन


                        पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन




              पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन का आज एक जीवंत नाम हो गया है - 'अटेवा'! अटेवा 'बुढ़ापे की लाठी' अर्थात् 'पुरानी पेंशन' की एकमात्र मांग को लेकर आज एक व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है। सभी सरकारी-सहायता प्राप्त शिक्षक-कर्मचारियों के अलावा लगभग हर सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों का इसे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है। लम्बे समय से संघर्षरत और उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी जन-जागरूकता फैला चुका यह संगठन 30 अप्रैल को दिल्ली में बड़ी रैली कर रहा है। यह रैली एक तरह से केंद्र सरकार के लिए एक और चुनौती खड़ी करेगी। 
            एक तरफ सार्वजनिक क्षेत्र को पूरी तरह कूड़ा-कबाड़ा सिद्ध करने और बनाने में जुटीं सरकारें एक-एक कर शिक्षकों-कर्मचारियों की सारी सुविधाओं में कटौती करती जा रही है, दूसरी तरफ बढ़ते जन-दबाव एवं आक्रोश का उसे सामना करना पड़ रहा है। अटेवा में अन्य लोगों के अलावा सरकारों के समर्थक तबकों के आगे-पीछे, दाएं-बाएं लगे होने के कारण ऐसी उम्मीद तो कम है कि इसे फ़िलहाल कोई वास्तविक सफलता मिल पाएगी, किन्तु कुछ घोषणाओं और आश्वासनों से इसे कुछ दिन चुप बैठने के लिए मनाया जा सकता है।

           काश! ऐसा न हो!!...सरकार को पुरानी पेंशन बहाल करना पड़े!....

             पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन की सबसे बड़ी सफलता इस बात में है कि इसने केंद्र और राज्य सरकारों की जन-विरोधी नीतियों को चुनौती दी है। यह चुनौती और आगे बढ़ेगी तथा बड़े बदलाव की ओर जन-आन्दोलनों की ले जाएगी, ऐसी उम्मीद करना चाहिए।
        खास तौर पर महाराष्ट्र के इस नौजवान जैसा यदि जज़्बा हो आंदोलनकारियों में तब-....


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