आत्मालाप-10: सपने सच होते हैं...
हमारे पुरखे और उनके सपने
- अशोक प्रकाश
अगर हमारे पुरखों ने बहस-मुबाहिसा को महत्त्व नहीं दिया होता
अगर वे सिर सिर्फ़ ऊपर-नीचे ही करते रहते
अगर वे जानवरों की तरह आ-आ...ऊ-ऊ ही करते, वाणी को तोड़-मरोड़कर विविध ध्वनियाँ न विकसित करते
अगर वे अपने, अपने जैसों-मनुष्यों के लिए प्रकृति से संघर्ष करने के साथ तालमेल न बिठाते
जानवरों को भी सुधार कर यथा-संभव अपने लिए उपयोगी न बनाते
तो हम न होते!...
उन्होंने हमारे लिए सुंदर सपने देखे, सच होते सपनों की कहानियां बनाई, उन कहानियों को सच बनाया....
इसलिए हमें भी सुंदर भविष्य, बेहतर मनुष्य, बेहतर मानव-सभ्यता के सपने देखना चाहिए, उन्हें पूरा करने का उद्यम करना चाहिए....
सपने देखिए, उन्हें पूरा करने की कोशिश कीजिए...
सपने
सच
होते
हैं! ★★★

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